Punjaban XXX Kahani
पंजाबन Xxx कहानी में पहले चुद चुकी भाभी ने मुझे कहा कि वो मेरे घर आना चाहती है. मैं खुश हो गया कि बढ़िया पंजाबी भाभी की चूत मिलेगी.
दोस्तो! मैं आपका दोस्त निखिल.
कुछ सफ़र ज़िंदगी में इतने हसीन हो जाते है जिन्हें हम कभीं भूल ही नहीं पाते और वो पल हमारी ज़िंदगी के हसीन पल बन जाते हैं
मेरी पिछली कहानी स्टेशन पे मिली भाभी को ट्रेन में चोदा में अपने पढ़ा कि कैसे मैंने जसप्रीत भाभी को ट्रेन के बाथरूम में चोदा.
अब आपके साथ शेयर करने जा रहा हूँ आगे की पंजाबन Xxx कहानी।
जिन्होंने अभी तक मेरी पहली कहानी नहीं पढ़ी है, वो ज़रूर पढ़ें और ईमेल करके मुझे बताएं कि आपको मेरी कहानी कैसी लगी! अब मैं ज़्यादा समय खराब न करते हुए सीधा कहानी पर आता हूँ।
हम दोनों ट्रेन से उतरे।
फिर वो अपने मायके जाने लगीं और मैं ऑफिस के बुक किए हुए होटल की तरफ।
मैंने दिल्ली स्टेशन से बाहर निकलकर ओला टैक्सी बुक की और होटल की तरफ जाने लगा।
मैं पूरे रास्ते जसप्रीत भाभी के बारे में ही सोचता जा रहा था कि पता नहीं अब कभी मुलाकात होगी भी या नहीं!
मैं अपने होटल पहुँच गया।
होटल ऑफिस की तरफ से पहले से ही बुक था।
मैं कमरे में भी भाभी के बारे में ही सोचता रहा।
जो क्लाइंट दुबई से आने वाले थे, उन्हें 10 बजे होटल पहुँचना था, लेकिन उनकी फ्लाइट 3 घंटे लेट चल रही थी।
तो मैंने सोचा कुछ देर आराम कर लिया जाए।
फिर मैं बाथरूम में जाकर नहाने लगा।
जैसे-जैसे मैं खुद को छू रहा था, मुझे जसप्रीत भाभी की ही याद आ रही थी; उनका चेहरा मेरे चारों तरफ घूम रहा था!
फिर मैं नहाकर बाहर आया और होटल रिसेप्शन पर चाय का ऑर्डर दिया।
कुछ देर बाद मेरे रूम की बेल बजी।
मैंने दरवाज़ा खोला तो एक लेडी अटेंडेंट (वेटर) मेरे सामने खड़ी थी।
उसने मुझे ‘गुड मॉर्निंग’ विश किया और चाय देकर चली गई।
मैं चाय पीकर रेडी होना शुरू हो गया।
कुछ देर बाद दुबई वाले क्लाइंट का फोन आया कि वे दिल्ली एयरपोर्ट पर आ गए हैं।
मैंने उन्हें बताया कि होटल की कैब उनका वेट कर रही है।
वे होटल आ गए और मैं रिसेप्शन पर उनके आने का इंतज़ार करने लगा।
उन्हें रिसीव करके मैंने उन्हें रूम में छोड़ दिया।
फिर कुछ देर बाद उनका फोन आया कि वे डील के पेपर साइन करके कहीं और जाना चाहते हैं।
मैंने जल्दी से अपना काम खत्म किया और वापस जालंधर आ गया।
फिर लाइफ काम में नॉर्मल चलने लगी।
एक दिन मैं ऑफिस की मीटिंग में था, तो मुझे एक मिस कॉल आई।
मुझे लगा कि किसी कंपनी वाले का फोन होगा तो मैंने कॉल बैक नहीं किया।
लेकिन कुछ देर बाद फिर से मिस कॉल आई।
मैंने ऑफिस की मीटिंग खत्म होते ही फोन चेक किया तो ‘जसप्रीत’ नाम शो हो रहा था!
मेरे मन में फिर से वासना छाने लगी और वो ट्रेन का सफ़र मेरी आँखों के सामने आने लगा।
मैंने उन्हें कॉल किया और कहा, “हेलो जसप्रीत जी! कैसी हैं आप?”
जसप्रीत, “अच्छा जी! आपको मैं याद हूँ? मुझे लगा कहीं आप मुझे भूल गए हो!”
मैं, “आपको कैसे भूल सकता हूँ जी? आप तो मेरी लाइफ का एक हसीन सपना हो!”
मैंने उनसे फ्लर्ट करना शुरू किया तो वो हँसने लग गईं।
जसप्रीत, “आपकी मीटिंग कैसी रही?”
मैं, “मैं तो बस आपके बारे में ही सोचता रहा!”
जसप्रीत, “अच्छा जी! क्या सोच रहे थे?”
मैं, “यही कि दोबारा आपसे मुलाकात होगी भी या नहीं? जो काम अधूरा रह गया, उसे पूरा करने का हकीकत में मौका मिलेगा भी या नहीं या सिर्फ सपनों में ही होगा!”
यह सुनकर वो हँसने लग गईं।
फिर हम ऐसे ही बातें करते रहे।
मैंने उनसे पूछा कि अब कब मिल सकते हैं हम?
तो उन्होंने कहा, “जल्दी ही मिलेंगे!”
मैंने उनसे उनकी फैमिली के बारे में पूछा क्योंकि उस दिन ट्रेन में जल्दी-जल्दी में पूछना ही भूल गया था।
उन्होंने बताया कि उनके पति का बिज़नेस जालंधर में ही है और उनकी एक बेटी है जो स्कूल जाती है।
कुछ देर इधर-उधर की बात करने के बाद उन्होंने मुझसे कहा कि मैं उन्हें फोन न करूँ, वो जब खुद फ्री होंगी तो फोन करेंगी।
और उन्होंने फोन कट कर दिया।
फिर जब भी कोई फोन या मैसेज आता, तो मैं तुरंत फोन निकाल कर देखता कि कहीं जसप्रीत का ही फोन तो नहीं है!
एक दिन रात को मुझे 11 बजे मैसेज आया कि उनके पति कल कहीं बाहर जाएंगे, तो क्या हम कल मिल सकते हैं?
मैंने तुरंत उन्हें “हाँ” बोल दिया और अपने ऑफिस HR को एक दिन की छुट्टी के लिए ईमेल किया कि मेरी तबीयत ठीक नहीं है।
सुबह जैसे ही मैं उठा, मैंने उनको मैसेज किया कि मिलना कहाँ पर है?
कुछ देर बाद उनका मैसेज आया, “आपके घर पे!”
मेरे मन में तो लड्डू फूटने लगे!
मैंने उनको अपने घर का एड्रेस मैसेज किया।
मैं खुद जालंधर में किराए पर रहता हूँ।
मकान मालिक जर्मनी में है तो उन्होंने पूरा घर मुझे ही देख-रेख के लिए सौंप रखा है।
थोड़ी देर बाद जसप्रीत का मैसेज आया कि उनके पति 7 बजे निकलेंगे, तो वो अपनी बेटी को स्कूल छोड़कर 9 बजे तक मेरे पास आ जाएगी।
उनका घर मेरे घर से 7 किमी दूर था।
फिर मैं जल्दी से उठा और घर की साफ़-सफाई करने लग गया।
पूरा घर बिखरा पड़ा था, आप समझ सकते हो बैचलर लाइफ कैसी होती है!
मैंने जल्दी-जल्दी सफाई की और फिर ट्रिमर लेकर बाथरूम में चला गया और हेयर रिमूव करने लगा।
हेयर रिमूव करने के बाद लण्ड एकदम चिकना हो गया!
फिर मैंने रूम में गुलाब वाला रूम फ्रेशनर मारा और जसप्रीत के आने का वेट करने लगा।
8:45 पर जसप्रीत का फोन आया कि वो लोकेशन पर आ गई हैं।
मैं घर के बाहर गया तो वो मेरे घर के बिल्कुल सामने अपनी स्कूटी (ऐक्टिवा) पर थीं।
उन्होंने ब्लैक कलर का सूट पहना हुआ था।
ब्लैक सूट में वो किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थीं!
मैंने उन्हें घर के अंदर आने को कहा।
उन्होंने अपनी एक्टिवा अंदर की और हेलमेट उतारा।
मैं तो उन्हें देखता ही रह गया!
वो पूरा मेकअप करके आई थीं, जैसे कोई परी आसमान से उतर कर आई हो!
फिर हम दोनों अंदर सोफे पर बैठ गए।
मैंने उनसे चाय-कॉफ़ी के लिए पूछा तो उन्होंने ‘ब्लैक कॉफ़ी विदाउट शुगर’ के लिए बोला।
मैंने दोनों के लिए कॉफ़ी बनाई और फिर हम दोनों ने साथ में कॉफ़ी पी।
फिर उन्होंने कहा कि वो 1 बजे तक फ्री हैं, उसके बाद उन्हें बेटी को स्कूल से लेने जाना है।
मैंने देर न करते हुए उन्हें सोफे पर ही किस करना शुरू कर दिया!
वो भी मेरा पूरा साथ देने लगीं।
किस करते-करते मैंने उनकी सलवार के अंदर अपना हाथ डाल दिया।
उनकी चूत एकदम चिकनी थी, जैसे ट्रेन में थी।
उन्होंने कहा कि उन्हें चूत पर बाल पसंद नहीं हैं।
मैं धीरे-धीरे सूट के ऊपर से उनकी चूची को दबाने लग गया, वो भी गरम होना शुरू हो गई थीं।
मैंने देर न करते हुए जल्दी से उनका सूट और सलवार दोनों निकाल दिए और अपनी टी-शर्ट और शॉर्ट्स भी उतार दिए।
अब वो सिर्फ लाल रंग की ब्रा और पैंटी में थीं।
गोरे बदन पर लाल रंग खूब जंचता है!
मैंने उनसे कहा, “मन तो कर रहा है कि आपको खा जाऊं!”
उन्होंने कहा, “खा लो! रोका किसने है!”
मैंने पहले उनकी ब्रा के हुक खोले और फिर उनकी पैंटी को निकाल दिया।
उनकी चूत एकदम सफेद दूध की तरह चमक रही थी!
उनकी चूत इतनी टाइट थी कि लग ही नहीं रहा था कि वो एक बेटी की माँ भी हैं।
मैं उनके पूरे बदन पर टूट पड़ा और उन्हें ज़ोर-ज़ोर से किस करने लगा।
वो भी मेरा साथ देने लगीं और मेरे लण्ड को ज़ोर-ज़ोर से सहलाने लग गईं।
मुझे कुछ मसखरी सूझी और मैंने उनकी एक चूची को ज़ोर से दबा दिया।
वो दर्द से चिल्ला उठीं!
उन्होंने बोला, “आराम से करो! मैं कहीं भाग के थोड़ी जा रही हूँ!”
फिर मैं धीरे-धीरे उनकी एक चूची को चूसने लगा और एक को हाथ से दबाने लगा।
मैं उनके पूरे बदन पर किस करने लगा।
फिर किस करते-करते मैं नीचे आ गया और उनकी टांगें फैला दीं।
मैं उनकी चूत के आसपास हाथ फिराने लगा।
उनकी चूत गीली हो गई थी।
फिर मैं उनसे अलग हुआ, वो पूरी गरम हो चुकी थीं।
मैं खड़ा हुआ और उन्हें लण्ड चूसने का इशारा किया।
वो सोफे से उठीं और लण्ड चूसना शुरू किया।
वो लण्ड को इतने ज़ोर-ज़ोर से चूस रही थीं जैसे उसे खा ही जाएंगी!
उनके मुँह से ‘गॉक-गॉक’ की आवाज़ आने लगी और मुँह से थूक भर-भर कर बाहर निकलने लगा।
मैंने उनकी गर्दन को ज़ोर से लण्ड पर दबा दिया, जिससे लण्ड उनके गले में अंदर तक चला गया।
उनकी आँखें बाहर आ गईं!
जसप्रीत ने मुझे पीछे धकेला, उनके मुँह से लार बाहर निकली और वो बोलीं, “अगर ऐसे करोगे तो मैं चली जाऊँगी!”
मैंने उन्हें उठाया और रूम में ले गया।
उन्हें बेड पर लेटा कर उनकी चूत चाटने लग गया।
उनकी चूत से मदहोश खुशबू आ रही थी, शायद उन्होंने ‘बिकनी परफ्यूम’ लगा रखा था।
अब जसप्रीत से कंट्रोल नहीं हो रहा था।
वो बोलने लगीं, “जल्दी से फुदी फाड़ दो यार! अब बर्दाश्त नहीं हो रहा!”
मैंने भी देर नहीं की। एक तकिया उनकी गाँड़ के नीचे लगाया और अपना लण्ड उनकी चूत पर रखकर ज़ोर से धक्का लगाया!
चूत गीली होने की वजह से लण्ड एक बार में ही पूरा अंदर चला गया।
उनकी तो मानो गाँड़ ही फट गई!
वो ज़ोर से चिल्लाईं, “आई अह्ह! ऊई ईईई! अह्ह… स्सीईई ईई! अआई ईई… उई ईईई माँ! मर गई आई ईईई! नहीं माँ! आआ आआ माँ मर गई… मम्मीई ईईई रे मर गयी!”
मैंने उनकी आवाज़ को अनसुना करते हुए सुपारे तक अपना लण्ड बाहर खींचा और फिर एक और ज़ोरदार शॉट मारा!
“आआ आआआ माँ मर गई… मम्मीई ईईई रे मर गयी!”
मैं कुछ देर रुका।
कुछ देर बाद वो खुद अपनी गाँड उठाने लगीं और लण्ड को अंदर लेने लगीं।
मैंने भी अपनी रफ़्तार बढ़ा दी और ज़ोर-ज़ोर से उनकी चुदाई करने लगा।
कुछ ही देर में दस-बारह धक्कों में ही उनकी गाँड़ में थिरकन बढ़ने लगी और हाथों का कसाव मेरे जिस्म पर बढ़ गया।
उनकी चूत ने पानी छोड़ दिया!
जसप्रीत को अब मज़ा आने लगा था, तो उनकी गाँड़ भी मेरे लण्ड के रिदम में उछलने लगी, “आअह्ह! आआह… आअ हहा! हह उऊउ… आअहह!”
वो बोलने लगीं, “और ज़ोर-ज़ोर से चोदो! फाड़ दो आज इस फुदी को!”
और वो अपने पति को गालियाँ देने लग गईं।
वो बोलीं, “मेरा पति कभी मेरी प्यास बुझा ही नहीं सका! साला हरामी, अपना पानी निकाल कर चला जाता है हर बार!”
जब भी लण्ड अंदर जाता, वो चूतड़ उछालकर पूरा लण्ड चूत में ले लेतीं।
हम दोनों इन लम्हों का मज़ा ले रहे थे।
एक रिदम के साथ लण्ड और चूत का मिलन हो रहा था।
‘पट-पट-पट-पट’ की आवाज़ गूँज रही थी।
अब मेरा भी निकलने वाला था, तो मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और उन्हें बोला कि मेरा होने वाला है, तो कहाँ पर निकालना है?
जसप्रीत ने बोला कि वो सारा माल अपनी चूत में ही लेना चाहती हैं!
मैंने जल्दी से कंडोम निकाला और लण्ड को उनकी चूत की अंतिम गहराई तक पहुँचा दिया।
5-6 शॉट के बाद मेरे लण्ड से पिचकारी सी चलने लगी और मेरा वीर्य उनकी चूत में अंदर तक भर गया।
उन्हें भी पूरा मज़ा आ रहा था।
जसप्रीत ने कहा, “कई सालों में आज इतनी ज़बरदस्त चुदाई हुई है! मज़ा आ गया!”
फिर मैंने जैसे ही लण्ड उनकी चूत से निकाला, उन्होंने जल्दी से लण्ड को पकड़ा और उसे चूसने लग गईं।
उन्होंने पूरा लण्ड चूस कर साफ़ कर दिया।
फिर हम दोनों अलग हुए और जसप्रीत बाथरूम में जाकर चूत साफ़ करने लगीं।
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