pooja ki chudai college mein
मेरा नाम साहिल है। कंप्यूटर साइंस से B.Tech किया। कॉलेज में मैं एक-दम नॉर्मल, शर्मीला लड़का था। पढ़ाई में अच्छा, लेकिन लड़कियों से बात करने में दिल धड़कने लगता था, हाथ काँपते थे। हमारे बैच में मैकेनिकल की एक लड़की थी – पूजा।
पूजा को देखते ही साँस अटक जाती थी। गोरी-दूध जैसी चिकनी स्किन, लंबे काले घुंघराले बाल जो कमर तक लहराते थे। गहरी भूरी आँखें जिनमें डूबने का मन करता था, और वो मुस्कान… वो मुस्कान जो सीधे दिल में उतर जाती थी और नीचे तक गर्मी फैला देती थी।
फिगर परफेक्ट – 34D-28-36। चूचे इतने भरे हुए कि टाइट कुर्ते में भी उभरे रहते। कमर इतनी पतली कि दोनों हाथों से आसानी से घेर लेता, और गांड गोल-भरी, जींस में लहराती हुई ऐसी कि कोई भी लड़का दो बार देखे बिना नहीं रह पाता।
शुरुआत में सिर्फ दोस्ती थी। लाइब्रेरी में साथ बैठते, नोट्स शेयर करते, कैंटीन में चाय पीते। कभी-कभी कैंपस के पीछे वाले सुनसान पार्क में शाम को घूमते, जहां कोई नहीं आता था। वो मुझे पहले “ साहिल भैया” कहती थी, लेकिन धीरे-धीरे वो “भैया” गायब हो गया। बस “साहिल” रह गया।
उसकी हँसी सुन कर मेरे अंदर कुछ हिल जाता था – एक अजीब सी खुजली, एक चाहत जो बढ़ती जा रही थी।
फाइनल सेमेस्टर के एग्जाम खत्म होने के बाद एक शाम उसका मैसेज आया: “आज शाम 7 बजे मेरे हॉस्टल के पास पुराने बंगले में आना। कोई नहीं होगा। सिर्फ तू और मैं। अंडरवियर मत पहनना। मैं भी नहीं पहनूँगी।”
दिल की धड़कन रुकने का नाम नहीं ले रही थी। मैंने अच्छा शावर लिया, अच्छा परफ्यूम लगाया, ब्लैक शर्ट और ट्रैक पैंट पहनी (जल्दी उतर जाए) और 6:50 पर वहाँ पहुँच गया। बंगला थोड़ा पुराना, सुनसान जगह। दरवाजा खुला तो पूजा सामने खड़ी थी – सफेद सलवार-सूट में, बाल खुले, हल्का काजल, गुलाबी लिपस्टिक। वो मुस्कुराई और मुझे अंदर खींच लिया।
दरवाजा बंद होते ही वो बोली: “आज मैंने सोचा है… हम दोनों काफी दिनों से इंतजार कर रहे हैं, साहिल। अब और नहीं रुक सकती। आज रात तू मेरा है, और मैं तेरी।”
मैं कुछ बोल नहीं पाया। वो मेरे करीब आई, गाल पर हाथ फेरा और धीरे से होंठों पर होंठ रख दिए। पहला किस्स नरम था, जैसे परीक्षा के पहले वाला नर्वस किस्स। लेकिन फिर उसकी जीभ मेरी जीभ से खेलने लगी – गहरा, गीला, गरम। मैंने उसकी कमर पकड़ी – बदन इतना गरम कि हाथ जलने लगा। उसकी साँसें मेरे चेहरे पर लग रही थी।
हम बेडरूम में गए। वहाँ सिर्फ एक छोटी पीली लाइट जल रही थी, जो कमरे को रोमांटिक और थोड़ा रहस्यमयी बना रही थी। पूजा ने मेरी शर्ट के बटन एक-एक करके खोले।
मैंने उसका दुपट्टा खींच लिया। सलवार की नाड़ी खोली, नीचे सरकाई। अब वो सिर्फ हल्की गुलाबी लेस वाली ब्रा और पैंटी में थी।
उसके चूचे इतने गोल और भरे हुए थे कि ब्रा मुश्किल से कवर कर पा रही थी। मैंने हुक खोला। ब्रा गिरती ही गुलाबी निप्पल्स सामने आए – सख्त, छोटे, मुझे बुला रहे थे।
मैं झुक कर एक को मुँह में ले लिया। जीभ से चक्कर लगाया, हल्का काटा।
पूजा ने सिर पकड़ कर दबाया – “आह्ह्ह… साहिल… धीरे… लेकिन मत रुकना… जोर से चूस मेरे चूचे… आह्ह…” दूसरे चूचे को हाथ से मसलता रहा।
निप्पल्स को उंगलियों से दबाया, खींचा।
पूजा की साँसें तेज हो गईं। उसने मेरी ट्रैक का नाड़ा खींचा, पैंट नीचे की। मेरा लंड पहले से ही फुल खड़ा था – मोटी, गरम, नसें उभरी हुई। उसने पैंटी के ऊपर से ही सहलाया, फिर बाहर निकाला।
“वाह साहिल… कितना मोटा और गरम लंड है… आज ये मेरी चूत में पूरा जाएगा… फाड़ेगा मुझे…”
उसने धीरे-धीरे ऊपर-नीचे किया, सुपाड़े पर जीभ फेरी। मैं कराह उठा – “पूजा… बस… झड़ जाऊँगा…” वो मुस्कुराई – “रुक जा… अभी तो शुरूआत है।”
फिर उसने मुझे बेड पर धकेल दिया। अपनी पैंटी उतारी। उसकी चूत – चिकनी, गुलाबी, साफ, थोड़ी गीली। क्लिट छोटा लेकिन सख्त। वो मेरे ऊपर बैठ गई। लंड को चूत के होंठों पर रगड़ने लगी। गीलापन मेरे सुपाड़े पर फैल रहा था – गरम, चिपचिपा।
मैं उठ कर बैठ गया, उसे गोद में बिठाया। गहरा किस्स। मैंने दो उंगलियाँ उसकी चूत में डाली। बहुत टाइट थी। अंदर-बाहर करते हुए क्लिट को अंगूठे से रगड़ा। पूजा कराह रही थी – “उम्म्म्म… साहिल… उंगलियाँ और अंदर… हाँ… ऐसे… अब लंड डालो ना… मेरी चूत तरस रही है तेरे लिए…”
मैंने उसे पीठ के बल लिटाया। दोनों पैर फैलाए। लंड का सुपाड़ा चूत के छेद पर रखा। धीरे से दबाया। पहले सुपाड़ा अंदर गया, फिर आधा लंड। पूजा ने आँखें बंद की – “आह्ह्ह… थोड़ा दर्द हो रहा है… लेकिन रुकना मत… पूरा डाल दे… मुझे अपनी बना ले…”
पूरा अंदर चला गया। दोनों ने एक साथ आह भरी। मैं रुक गया – सिर्फ अंदर रहने का एहसास लिया। फिर धीरे-धीरे मूवमेंट शुरू किया। हर थ्रस्ट के साथ उसके चूचे उछल रहे थे। मैंने एक हाथ से चूचा दबाया, दूसरे से कमर पकड़ी। गति बढ़ी। कमरा उसकी कराहों से भर गया – “जोर से… साहिल… और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो… हाँ… ऐसे… गहरा… आह्ह्ह…”
मैंने उसे पलटा – डॉगी स्टाइल। उसकी गोल-गोल गांड मेरे सामने थी। मैंने गांड पर हल्का थप्पड़ मारा। वो चिल्लाई – “हाँ… मारो… और जोर से ठोको… बाल खींचो…” पीछे से लंड डाली, तेज-तेज ठोकना शुरू। हर धक्के में “पच्च… पच्च…” की आवाज। चूत बहुत गीली हो चुकी थी, रस टपक रहा था, मेरी जांघों पर गिर रहा था।
कुछ मिनट बाद मैं थक गया। पूजा बोली – “अब मैं ऊपर आती हूँ।” वो cowgirl में बैठ गई। लंड अंदर लिया और कमर हिलानी शुरू की। कभी तेज, कभी धीरे। उसके चूचे मेरे सामने उछल रहे थे। मैंने दोनों पकड़ कर मसले, निप्पल्स चूसे। वो कराह रही थी – “मैं आने वाली हूँ… साहिल… आह्ह्ह…!”
उसके शरीर में कंपन हुआ। चूत ने लंड को कस कर पकड़ा। वो झड़ गई – बहुत सारा पानी निकला, चादर गीली हो गई। मैं भी 4-5 सेकंड बाद उसके अंदर ही झड़ गया। गर्म वीर्य चूत में भर गया।
हम थक कर लेट गए। पूजा मेरी छाती पर सिर रख कर लेटी रही। उसकी चूत से हमारा मिश्रित रस बाहर निकल रहा था। वो फुसफुसाई – “साहिल… ये पहली बार था… लेकिन आखिरी नहीं होगा। मैं तेरी हूँ… हमेशा।”
उस रात हम रुके नहीं। थोड़ी देर आराम के बाद दूसरा राउंड। इस बार मिशनरी में ही, लेकिन पैर मेरे कंधों पर। मैं गहराई तक जा रहा था। पूजा चिल्ला रही थी – “हाँ… वहाँ… और गहरा… चोदो मुझे… पूरी रात… मेरी चूत तेरी है…”
तीसरा राउंड शावर में। गर्म पानी चलाया। वो दीवार से टिक गई। मैंने एक पैर उठा कर कमर पर रखा। खड़े-खड़े लंड डाला। पानी के नीचे चूत चाटी – क्लिट चूसा, जीभ अंदर डाली। फिर ठोका। स्लिपरी, गरम, वाइल्ड। वो मेरी गर्दन में मुँह छुपा कर कराह रही थी – “पानी में चुदाई… कितना अच्छा लग रहा है… झड़ जाऊँगी फिर से… आह्ह्ह…”
चौथा राउंड बेड पर 69 में। मैं नीचे, वो ऊपर। उसकी चूत मेरे मुँह पर। मैं क्लिट चूस रहा था, जीभ अंदर डाल रहा था। वो मेरे लंड को गहराई तक ले रही थी, गेंदें चाट रही थी। दोनों ने एक साथ झड़ दिया – मैं उसके मुँह में, उसने सब निगल लिया।
सुबह 5 बजे तक हम करते रहे। फिर थक कर सो गए। सुबह वो मेरे सीने पर सिर रख कर बोली – “साहिल… ये रात मेरी जिंदगी की सबसे खास रात थी। तू मेरा पहला था… और सबसे अच्छा। कभी मत भूलना मुझे।”
कॉलेज खत्म हुआ। हम अलग-अलग शहर चले गए। मैं बैंगलोर में एक अच्छी IT कंपनी जॉइन कर ली। 4 साल वहाँ अच्छी सैलरी, अच्छा फ्लैट, दोस्त, पार्टी – लाइफ सेट लग रही थी। लेकिन 2023 में कंपनी ने बड़े लेऑफ किए। मेरी टीम पूरी की पूरी निकाल दी गई। मैं भी। दिल टूट गया। सुबह उठते ही डर लगता था – अगला बिल कैसे चुकाऊँगा? जॉब सर्च शुरू। रिज्यूमे भेजते-भेजते थक गया।
Linkedln पर रोज 50-60 अप्लाई। इंटरव्यूज में रिजेक्ट। रातों को नींद नहीं आती। पूजा का मैसेज आता रहता – “कैसा है साहिल? सब ठीक?” लेकिन ज्यादा बात नहीं होती। वो दिल्ली में थी, अपनी जॉब में बिजी।
6 महीने की स्ट्रगल के बाद दिल्ली की एक अच्छी MNC से ऑफर आया। सीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर। पैकेज अच्छा। दिल्ली शिफ्ट हो गया। छोटा 1BHK फ्लैट लिया, रोज मेट्रो से ऑफिस। ब्लू लाइन – सुबह की भीड़, शाम की थकान। लेकिन आदत पड़ गई।
2-3 महीने हो गए थे। एक शाम ऑफिस से लौट रहा था। ट्रेन में भीड़। हैंडल पकड़े खड़ा था। अचानक नज़र एक लड़की पर पड़ी। वो मेरी तरफ देख रही थी। मुस्कुरा रही थी। वही मुस्कान – वो मुस्कान जो दिल में उतर जाती थी।
पूजा!
वो भी मुझे देख कर चौंकी, आँखें बड़ी हुई, फिर बड़ी-बड़ी मुस्कान दी। ट्रेन में आँखें मिलती रहीं। नेहरू प्लेस स्टेशन आया। वो उतरी। मैं भी उतर गया। प्लेटफॉर्म पर वो रुकी। मैं पास गया। दिल धड़क रहा था।
“साहिल?” उसकी आवाज थोड़ी काँप रही थी।
“पूजा… तू?”
“हाँ… दिल्ली में ही हूँ। प्रोजेक्ट मैनेजर बन गई। तू कब आया?”
“3 महीने हुए। बैंगलोर से लेऑफ के बाद। नई जॉब यहीं लगी।”
हम हँसे। वो बोली, “चल, बाहर निकलते हैं। बात करेंगे। इतने साल बाद…”
स्टेशन से बाहर। पास में एक छोटा कैफे। बैठे। कॉफी ऑर्डर की। पूजा अब और ज्यादा अट्रैक्टिव लग रही थी। बाल थोड़े स्टाइलिश कट, मेकअप परफेक्ट, टाइट ब्लाउज में चूचे और भी उभरे हुए। वो बोली – “साहिल… वो रात याद है? मैं आज भी सोचती हूँ।
तेरे लंड का एहसास, तेरी ठुकाई, तेरी वो गर्मी मेरी चूत में… कभी-कभी रात को अकेले में उंगलियाँ डालकर तेरे बारे में सोचती हूँ।”
मैंने कहा, “मैं भी भूल नहीं पाया। तेरी चूत की टाइटनेस, तेरी कराहें, तेरी गांड पर थप्पड़ मारने का मजा। हर रात याद आती है।”
वो शरमा कर बोली, “अब हम दिल्ली में हैं। रोज मिल सकते हैं। मेट्रो में, ऑफिस के पास… मेरे फ्लैट पर। आज शाम मेरे पास आ।”
मैंने हाथ पकड़ा, “ठीक है। लेकिन रोल प्ले करेंगे। जैसे पहले किया था। आज तू मेरी बॉस बनेगी।”
वो हँसी, “डील। शाम 8 बजे मेरे फ्लैट पर।”
शाम 8 बजे मैं उसके फ्लैट पर पहुँचा। दरवाजा खुला। पूजा ब्लैक टाइट ड्रेस में – नेकलाइन गहरी, जांघें दिख रही थी। दरवाजा बंद होते ही वो मुझे दीवार से सटाकर किस्स करने लगी। जीभ अंदर, गहरा। मैंने ड्रेस ऊपर की – अंदर कुछ नहीं। चूचे बाहर। निप्पल्स सख्त। मैंने चूसा। वो कराही – “आह्ह… बॉस के चूचे चूस… जोर से… मैं तेरी बॉस हूँ… प्रमोशन चाहिए तो मुझे खुश कर…”
नीचे सरका। चूत पहले से गीली। जीभ से क्लिट चाटा। उंगलियाँ डाली – दो, फिर तीन। वो झड़ी – “पी ले… सब पी ले मेरे रस को… आह्ह्ह…!”
फिर वो मेरी पैंट उतारी। लंड बाहर। “वही मोटा लुंड… आज मेरी चूत फिर फाड़ेगा।”
उसे सोफे पर लिटाया। पैर फैलाए। लंड डाला। “पूरा… धीरे… आह्ह… जोर से चोद… बॉस को खुश कर!” तेज ठोका। चूचे उछल रहे।
इस तरह उसकी आवाज से मैं और उत्तेजित हो गया और जोर-जोर से झटके मारने लगा, मेरा लंड उसकी बच्चेदानी तक जा रहा था, हमने तकरीबन 1 घंटे तक सेक्स किया।
फिर मैं उसकी चूत में ही झड़ गया। फिर हम दोनों बाथरूम जा कर एक साथ नहाए और फिर नंगे ही सो गए।
सुबह वो मेरे सीने पर सिर रख कर बोली – “साहिल… लेऑफ अच्छा हुआ। वरना कभी नहीं मिलते। अब रोज मेट्रो में मिलेंगे। कभी खाली कोच में किस्स। कभी मेरे फ्लैट पर पूरी रात। कभी ऑफिस के स्टोर रूम में रिस्की चुदाई। हमारा प्यार पुराना था, लेकिन अब और गहरा हो गया।”
अब हमारा रिश्ता फिर से शुरू हो गया। मेट्रो में आँखें मिलती हैं। कभी हाथ छूते हैं। कभी लिफ्ट में किस्स। ऑफिस के बाद फ्लैट पर चुदाई। वो रात कॉलेज वाली याद दिलाती है, लेकिन अब ज्यादा प्यार, ज्यादा वाइल्ड, ज्यादा इंटेंस।
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