bahanchod kahani
बहनचोद कहानी में मैंने बताया है कि दिन में एक बार मेरे लंड से अपनी चूत की सील तुड़वाने के बाद रात को मेरी बहन दोबारा चुदाई का मजा लेने मेरे बिस्तर में आई.
सभी पाठकों का पुनः स्वागत है इस कहानी पर!
मैं माफी भी चाहूंगा कि कहानी को लिखने में थोड़ा बहुत गड़बड़ी हो सकती है।
बहनचोद कहानी में जो भी त्रुटि हो, उसके लिए पहले ही माफी मांगता हूँ।
जैसा कि आप सबने मेरी पहली कहानी कुंवारी बहन चुदी बरसात में मेरी बहन आज मेरे लन्ड से बारिश में चुद चुकी थी, लेकिन खेत में थोड़ा सा काम बाकी था।
हम दोनों भीगे हुए थे, तो वो बाहर ही बैठी रही।
मैं चुपचाप उठा, बाकी का काम खत्म करके उसे घर चलने को बोला।
हम घर आ गए।
शाम हो चुकी थी और लगभग अंधेरा होने को ही था।
उसने तुरंत नहा के कपड़े बदल लिए।
भाभी खाना बना रही थी।
मैं भी नहाया और टॉयलेट करने मैदान में चला गया।
जब मैं वापस आया तो सब खाना खा रहे थे।
मैंने भी खाना खाया और सोने आ गया।
दूसरे घर के बाग में एक मड़ई बनी है, मैं वहीं अकेले सोता हूं।
प्रीति गवर्नमेंट जॉब की तैयारी कर रही है तो वो अपना ऑनलाइन क्लास देखने लगी।
अब बहनचोद कहानी के मुख्य हिस्से पर आते हैं।
रात में 10:30 तक उसकी क्लास रहती है।
करीब 11:00 बजे उसने व्हाट्सएप पर मैसेज किया।
प्रीति, “हेलो!”
मैं, “बोलो!”
प्रीति, “क्या कर रहे हो भईया?”
मैं, “लेटा हूं, अपना बताओ?”
प्रीति, “बहुत अजीब लग रहा है!”
मैं, “क्या हुआ?”
प्रीति, “हमें ऐसा नहीं करना चाहिए था!”
मैं, ” गलती तुम्हारी है, शुरू तो तुमने ही किया था ना!”
प्रीति, “मैंने क्या किया?”
मैं, “जब मोम के पास आग जलाओगी, तो मोम तो पिघल ही जायेगा ना मैडम!”
प्रीति, “हां! और आपने क्या किया?”
मेरा लन्ड अब धीरे-धीरे खड़ा हो रहा था।
मैं, “कुछ नहीं मेरी जान, बस एक कोरे कागज में साइन कर दिया कि This is my property! 😊”
प्रीति, “अच्छा जी! और लिखना क्या है कोरे कागज पे जिसपे साइन किए हो?”
मैं, “आओ बताता हूं!”
प्रीति, “अच्छा! इतने के बाद भी आऊंगी?”
मैं, ” क्या हुआ?”
प्रीति, “पूछ ऐसे रहे हो जैसे कुछ पता ही न हो!”
“पता तो नहीं था, लेकिन आज पता कर लिया।”
प्रीति, “अच्छा!”
तो मैं तुरंत बोल दिया, “सब करते हैं यार!”
प्रीति, “पहले भी किए थे किसी के साथ?”
मैं, “नहीं!”
प्रीति, “सही बोलो!”
मैं, “सच में नहीं यार, आज पहली बार था! पता नहीं अच्छे से किया कि नहीं? अच्छा मुझसे पूछो क्या हाल कर दिए हो!”
प्रीति, “क्या कर दिया यार? मजा तो फिर भी नहीं आया!”
मैं, “तुम बताओ कैसा लगा? मेरा मतलब मजा आया कि नहीं?”
प्रीति, “😡😡😡😡 (इमोजी भेजकर) बोलो मत!”
मैं, “यार इसमें गुस्सा करने की क्या बात है? कभी न कभी तो होना ही था ये!”
प्रीति, “मतलब?”
मैं, “सेक्स तो सभी करते ही हैं ना? वैसे भी तुझको बहुत दिनों से…”
प्रीति, “बहुत दिनों से क्या?”
मैं, ” पसंद करता था! लेकिन सगी बहन होने के नाते डरता था बोलने में। सोचता था बुरा मान जाओगी या घर पे बोल दोगी तो वाट लग जाएगी मेरी! खैर छोड़ो, अब क्या फायदा बताने का।”
प्रीति, “बताओ ना और कुछ!”
मैं, ” पहले तुम बताओ कैसा लगा आज बारिश में?”
प्रीति, “अच्छा लगा! लेकिन जल्दी में मजा नहीं आया, कुछ टाइम और मिला होता तो!”
मैं, “तो क्या होता?”
प्रीति, “और अच्छा लगता!”
मैं, “आओ अब तो टाइम ही टाइम है!”
प्रीति, “नहीं! सो जाओ चुपचाप!”
मैं, “आओ ना यार!”
प्रीति, “बोला ना नहीं!”
मैं, “ओके, आपकी मर्जी!”
मैंने यह बोलकर नेट बंद कर दिया।
5 मिनट बाद नेट चालू किया तो उसके 3 मैसेज आए थे, “सो जाओ चुप मारकर!, अच्छा कल आऊंगी, क्या हुआ?”
और वो ऑनलाइन ही थी।
मैंने मैसेज देखकर जवाब नहीं दिया और फिर नेट बंद कर दिया।
तभी उसका कॉल आया।
मैं, “हेलो!”
प्रीति, “नेट चालू करो!”
मैं, “क्यों? मुझे नींद आ रही है।”
प्रीति, “आज मैं नहीं सोने दूंगी!”
मैं, “यार तुमको पता नहीं है मैं कितना तड़प रहा हूँ तुम्हारे बिना, लेकिन तुम पता नहीं कितना भाव खा रही हो!”
प्रीति, “भाव खाने की बात नहीं है, मुझे कुछ प्रॉब्लम है।”
मैं, “बताओ!”
प्रीति, “नहीं बता सकती!”
मैं, “तब आओ, नहीं तो सो जाओ!”
यह बोलकर मैंने फोन काट दिया।
उसने 8 बार फोन किया पर मैंने रिसीव नहीं किया।
करीब 40 मिनट बाद प्रीति आई और मेरी मच्छरदानी में घुस गई।
प्रीति, “नाराज बहुत जल्दी होते हो!”
मैं, “पूछा क्या प्रॉब्लम है?”
प्रीति, “कुछ नहीं, थोड़ा दर्द कर रही है।”
मैं, “बस इतनी सी बात है ना! अभी सब सही हो जायेगा।”
प्रीति, “कैसे?”
मैंने उसके दोनों गाल पकड़ कर होंठ पर किस करके बोला, “बस ऐसे!”
तभी वो शरारत के मूड में बोली, “दर्द कहीं और है!”
मैं, “आज तो कुछ भी नहीं बचेगा, वहां भी पहुंचूंगा मैडम!”
मैंने उसके होंठों पर किस करना शुरू कर दिया।
5 मिनट तक दोनों एक दूसरे के होंठों को चूसने में लगे रहे।
मैंने उसके कान में बोला, “अभी तुम्हारी चूचियां नहीं देखी हैं! पहले शर्ट निकालो!”
वो थोड़ा नखरे के अंदाज में बोली, “अब आपकी नहीं चलेगी!”
मैं, “अच्छा! अब बच के दिखाओ!”
प्रीति शरमाने लगी और मुस्कुराई।
मैंने उसका कमीज निकाल के सर के पास रख दिया।
अंदर उसने मरून कलर की ब्रा पहनी थी।
क्या गजब की फिटनेस थी!
दोनों चूचियां एकदम साइज के ब्रा में फिट थीं, जिसका साइज 34 था।
उसकी चूचियों का साइज संतरे के जैसा था।
ब्रा निकाल के मैं तो देखता ही रह गया।
गोरी-गोरी चूंची पर भूरे रंग के निप्पल, जो अभी मटर के दाने के साइज के थे।
चूचियां मस्त हाथों में आ जा रही थीं, ऐसा लग रहा था मेरे लिए ही संभाल के रखी थीं।
उसकी एक चूची के निप्पल को मैंने मुंह में लिया और हल्का सा दांत लगाया।
वो “आह्ह्ह्ह” की आवाज के साथ मुझे सीने से कस ली।
दूसरा निप्पल मैंने पूरे पंजे में लेकर हाथों से मसलना शुरू किया।
वो गजब की टाइट थी!
वो भी अब पूरी गर्म हो चुकी थी।
सलवार के ऊपर से ही उसकी चूत पर हाथ लगाया तो पता चला अंदर चड्डी भी पहनी है।
मैंने सलवार खोलना चाहा तो उसने रोक दिया।
मैंने थोड़ा जोर लगाया और डोरी खोल दी।
वह मदमस्त आवाज में बोली, “बहुत जलन हो रही है अंदर!”
मैं, “अभी सब सही हो जायेगा!”
मैंने सलवार के साथ चड्डी भी निकाल के उसे पूरा नंगा कर दिया।
वो फूल वाली अंडरवियर पहनी थी।
मैंने पूछा तो बोली कि उसे ये अच्छी लगती है।
मैं, “मुझे तो कट वाली अच्छी लगती है, अब वो लेना!”
प्रीति, “लेकर ही आ जाना!”
मैं, “ठीक है मैडम! अब तो आप ऑर्डर करो बस, बंदा हाजिर है सेवा में!”
मेरी आदत है कि मैं सिर्फ अंडरवियर में ही सोता हूं।
मैं सिर्फ अंडरवियर में पहले से ही था, उसे भी निकाल दिया और पूरा नंगा हो गया।
अब उसके पैरों की तरफ आकर दोनों पैर फैलाकर सीधा चूत पर मुंह लगा दिया।
उसे अलग ही सुकून मिला।
वो गांड उठा कर चटवाने लगी।
मैंने जीभ बोर में डाल के पूरी चिकनी कर दी।
फिर लन्ड सेट करके हल्का दबाव दिया।
वो पूरा कसे हुए अंदर जा रहा था।
प्रीति आंखें बंद करके गांड़ उठा के उसे अंदर ले रही थी।
आधा अंदर घुसा था कि मैं रुक गया।
फिर थोड़ा सा पीछे लेकर एक झटके में पूरा पेल दिया!
प्रीति, “आअह्ह्ह मम्म म्मी!”
उसने अपने नाखून मेरी पीठ में गड़ा दिए और अब असली चुदाई चालू हो गई।
प्रीति “आह्ह्ह आह्ह्ह मम्मी स्सी आह” जैसी आवाजें निकाल रही थी।
होंठ से होंठ मिलाने के बाद “चप-चप” की आवाजें गूंजने लगीं।
कभी चूचियां मुंह में लेकर मैं “ममूह आह” जैसी आवाजें निकाल रहा था।
उसके निप्पल के चारों ओर दांतों के निशान पड़ गए थे।
फिर मैं नीचे हो गया और वो लन्ड पर बैठ के उछल-उछल के चुदी।
20 मिनट बाद मेरे लन्ड ने पानी छोड़ा और पूरा बुर में भर दिया।
10 मिनट बाद एक बार फिर घमासान चुदाई हुई।
झड़ते टाइम मैडम के पैर कांपने लगे थे।
मैंने भी अपना खाली कर दिया।
वो कपड़े पहनी और 3 बजे के करीब जाके सोई।
सुबह में उठा तो पता चला उसकी तबीयत खराब है और उसे बहुत तेज बुखार हो गया है।
घर वाले बोले कि पानी में भीगने से हुआ है.
बाकी हम दोनों जानते हैं कि आज मैडम जी भर के चुद चुकी हैं।
खैर, मैं ही गया और दवा लेकर आया।
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