बड़ी गांड वाली कातिल आंटी की चुदाई

Big Ass Aunty X Kahani

बिग ऐस्स आंटी X कहानी में मुझे सड़क पर एक ड्राइविंग लाइसेंस मिला तो एड्रेस देखकर मैं उसे देने उसके घर गया. वहां आंटी मिली जो खूब मस्त थी. उन्होंने मुझे अंदर बुलाया.

दोस्तो, यूँ ही बस एक दिन कॉलेज से वापस आ रहा था.
रास्ता सुनसान था, कोई था नहीं.
मैं धीरे-धीरे बाइक चला रहा था.

अचानक मेरी नज़र सड़क पर जा पड़ी … वहां कुछ कार्ड जैसा गिरा हुआ था.
मैंने बाइक रोकी और वह कार्ड उठाया.
ध्यान से देखा तो वह ड्राइविंग लाइसेंस था … शायद किसी का गिर गया होगा.

मैंने नाम पढ़ा तो वह एक औरत का लाइसेंस था.
जन्मतिथि देखी तो वह 37 की महिला का कार्ड था. उसका नाम, फोटो सब वहां लिखा था.

उसका नाम अनीशा लिखा था.
उसकी फोटो में वह बहुत सुंदर दिखती थी.

लाइसेंस ओरिजिनल था, तो मैंने सोचा इसे उस लेडी तक पहुंचा देना चाहिए वरना उसको तकलीफ होगी.
अब मैं उस लिखे हुए एड्रेस पर गया और डोरबेल बजाई.

अनीशा ने ही दरवाज़ा खोला.
बाप रे बिल्कुल माल जैसी खूबसूरत आंटी थी वह … एकदम देसी कट्टा … साड़ी पहनी थी ऑरेंज कलर की, खुले गले वाला ब्लाउज, देसी हेयर स्टाइल और हंसता हुआ चेहरा.

उसकी साड़ी और ब्लाउज के बीच की खाली जगह से उसकी गोरी लचीली कमर दिखाई दे रही थी.

उसके बाल लंबे थे. उसके मादक होंठ … देख कर बस चूम लेने का मन कर रहा था.
और उसके बोबे तो क्या कमाल के थे … एकदम टाइट ब्लाउज से चिपके हुए गोल देसी बोबे … पकड़ कर वहीं दबाने का मन हो रहा था.

बस … बिग ऐस्स आंटी X कहानी की शुरुआत होने के लक्षण दिखने लगे थे.
मैंने कहा- ये आपका लाइसेंस है?
वह बोली- अरे हां, ये कहां मिला आपको?

‘जी, वह रास्ते में था तो मॉल के बाहर गिरा हुआ था. मैंने सोचा लौटा दूँ!’
‘ओह थैंक्यू सो मच, अच्छा हुआ, वरना मुझे दोबारा टेस्ट देना पड़ता!’
ऐसा कहकर वह हंसने लगी.

उसकी स्माइल देखकर मैं बस उसे देखता ही रहा.
फिर मैंने कहा- आपकी खूबसूरती देखकर ही सब फेल हो जाएंगे!

वह एकदम से अचकचा गईं और मेरी तरफ घूरने लगीं.
थोड़ी देर बाद मैं हड़बड़ाया कि मैं ये क्या बोल गया.
मैं हकलाया- मैं … मैं … वह मेरा वह मतलब नहीं था.

फिर वह हल्का सा मुस्कुराई और इधर-उधर देखने लगी.
शायद उसे मेरा फ्लर्टिंग करना पसंद आ गया था.

फिर वह बोली- छोड़ो … अन्दर आओगे प्लीज़!
मैंने कहा- नहीं, मुझे देर हो रही है.

‘अरे इतनी दूर से मेरा लाइसेंस लौटाने आए हो, ऐसे कैसे चले जाओगे … और पता है .. मेरे घर आकर कोई खाली हाथ नहीं जाता … अब चलो भी न!’
तो फिर मैं उसके घर के अन्दर गया.

उसने मुझे चाय पिलाई.
चाय का कप देते वक्त हमारे हाथ एक-दूसरे से टकरा गए.
मैं कुछ बोल नहीं पाया.
मैंने सोचा ज्यादा बोलूँगा तो ये सोचेगी कि मुझ पर लाइन मार रहा हूँ.

मैंने कुछ देर बाद कहा- अच्छी चाय थी … चलो अब चलता हूँ!
मैं बाहर जाकर बाइक चालू करने लगा तो बाइक स्टार्ट ही नहीं हुई.

अचानक से मुझे ख्याल आया कि शायद पेट्रोल खत्म हो गया है.

सुबह ही सोच रहा था कि पेट्रोल डलवा लूं, पर लाइसेंस देने के चक्कर में मैं उसका घर ढूँढते-ढूँढते यहां तक आ गया था, तो बाइक में पेट्रोल नहीं बचा होगा.
अब मैं बाइक घसीटते हुए लेकर चलने लगा.

इतने में पीछे से आवाज़ आई- अरे तुम्हारा पेट्रोल खत्म हो गया लगता है. रुको!
वह दौड़ती हुई बाहर आई.

‘अरे रुको एक मिनट!’
वह यह कहकर अन्दर गई और एक बोतल लेकर आई.

उसने अपनी स्कूटी से पाइप की मदद से थोड़ा सा पेट्रोल निकाल कर मुझे देते हुए कहा- तुमने मेरी मदद की, तो मैं तुम्हारी मदद कर देती हूँ. तुम्हारी बाइक में पेट्रोल डाल देती हूँ.

इतना कहकर वह खुद ही पेट्रोल डालने लगी.
मैं उसके बोबों के उभार को देखता रहा.
वह भी ये जान गई थी कि मैं उसके रसभरे मम्मों को घूर रहा हूँ.

उसने कनखियों से मुझे देखते हुए कहा- लो, इतना काफी है!
मैंने कहा- हां, काफी है … काम चल जाएगा. थैंक्यू, आप बहुत ही अच्छी हैं … और आपकी स्माइल भी!

वह फिर हंसने लगी और मुड़कर चली गई.
मेरी नजर उसके चूतड़ों पर गई तो बाप रे … उसकी देसी बड़ी सी गोल गांड गजब मटक रही थी.
चूतड़ों से चिपकी हुई साड़ी में उसकी पैंडुलम के जैसी हिलती हुई गांड देख कर लौड़े ने हाय हाय करना शुरू दी थी.

उसकी चलने की अदा देख कर सच कह रहा हूँ मेरा कलेजा हलक में आने को था.
क्या मादक अदा थी आह … दिल तो ऐसा कर रहा था कि इसे अभी के अभी पकड़ कर चोद दूँ और एक एक करके ढेर सारे बच्चे पैदा कर लूँ.

कुछ देर बाद मैं वहां से चला गया.

उस रात को मैं अनीशा आंटी को याद करता रहा.

मेरा लौड़ा तनकर बहुत ही सख्त खड़ा हो गया था.
इतनी खतरनाक गर्म माल जैसी सेक्सी आंटी मैंने कभी नहीं देखी थी.

सच में मेरा लौड़ा इतना कड़क हो गया था कि मानो अभी इसे आंटी की चुत चोदने को नहीं मिली तो फटकर बाहर निकल आएगा.
जैसे-तैसे लौड़े की मुठ मार कर मैंने रस झाड़ा और लौड़े को पकड़ कर ही सोने की कोशिश करने लगा.

मुझे नींद ही नहीं आ रही थी.

फिर भी घड़ी में रात के एक बजने का संकेत हुआ तो मैं उठ गया.
नींद नहीं आ रही थी तो मैंने फेसबुक में जाकर अनीशा का नाम सर्च किया.

उसमें अनीशा नाम के बहुत सारे अकाउंट थे.
आखिर अनीशा आंटी का अकाउंट मिल गया.

मैंने आंटी को देखा हुआ था तो उसकी प्रोफाइल में चेहरा देखने कर पहचानने में जरा सी भी देर नहीं लगी.

अब मैं सोच रहा था कि आंटी को रिक्वेस्ट भेजूँ या नहीं … फिर मैंने भेज ही दी.

कमाल की बात यह थी कि इतनी रात को भी दो मिनट बाद ही आंटी का रिप्लाई आ गया.
मेरी रिक्वेस्ट एक्सेप्ट हो गई थी मतलब वह भी जाग रही थी.

मैंने मैसेज किया- हैलो!
उसने भी कहा- हाय … मुझे पहचाना?

मैंने लिखा- मैं वही हूँ जो अभी आपके घर आया था.
‘हां, तुम ही हो. मुझे पता था तुम मुझे ढूँढ लोगे फेसबुक पर … ट्राय करोगे मुझ पर लाइन मारने की!’

मुझे लगा कि ये तो बड़ी चालाक लोमड़ी के जैसी है, सब कुछ पहले से जान लेती है. इसके सामने मेरी नहीं चलेगी.
लेकिन वह सामने से ही रिप्लाई दे रही थी तो कुछ उम्मीद बन गई थी.

मैंने कहा- वह बस … मैं फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजना चाहता था. आप एक अच्छी इंसान हो इसलिए!

वह बोली- अच्छा? मैं तुझे इतनी जल्दी इतनी अच्छी लगने लगी?
मैंने कहा- इसमें शक ही नहीं है … आप सच में परी जैसी हो.

‘अच्छा एक काम कर … कॉल कर मुझे ले, ये मेरा नंबर!’
ये आंटी तो खुद नंबर दे रही है, मस्त अदा है.

फिर मैंने उसे कॉल किया ‘हैलो.’

उसकी मीठी आवाज आई- सच बता, ऐसा क्या देख लिया तूने मुझमें? मैं तो उतनी खूबसूरत भी नहीं हूँ … सांवली हूँ!
‘नहीं, आप वाकयी लाजवाब हो, आपके जैसी बीवी अगर मेरे पास होती ना, तो ऐसे बांहों में भरकर रखता कि बस उसके अलावा और कोई दिखाई ही न देती!’

मेरा ये कहना हुआ ही था कि माहौल दो मिनट के लिए शांत हो गया.
उस तरफ से कोई आवाज नहीं आई.

फिर कुछ देर बाद वह बोली- क्या सच में? मेरे पति ने भी ऐसा प्यार नहीं जताया आज तक, तू क्यों जता रहा है … सच बोल, क्या है तेरे दिमाग में? मेरे जैसी ढल चुकी उम्र वाली औरत को प्यार की बातें क्यों कर रहा है तू?

आखिर मैंने सच उगल ही दिया- आंटी, आपकी मदमस्त गांड मुझे पागल बना देती है. आपकी चाल बहुत सेक्सी है … आप बहुत हॉट हो … बिग ऐस्स आंटी, आपको जी भर के चोदने का मन करता है!

‘आ गई ना तेरे मन की चाहत … साले अपनी असली औकात पर आ गया … मैं जानती थी … लेकिन तूने सच बोल दिया, वह मुझे पसंद आया. सब मर्द सच नहीं बोल पाते, प्यार का नाटक करते हैं.’

‘हां आंटी, लेकिन मुझे ऐसा नाटक नहीं आता. सच में आपकी गांड पकड़ने का बहुत मन करता है. आपके होंठों से होंठ मिलाकर आपकी गांड दबोच कर आपको खूब प्यार से चोदना चाहता हूँ मैं. मुझे आपसे प्यार हो गया है बाकी मर्जी आपकी … मैं जबरदस्ती नहीं करूँगा. अगर आप कहें तो फोन भी नहीं करूँगा. लेकिन अगर आप मेरी गर्लफ्रेंड बनना चाहती हो, तो फिर मैं आपको छोड़ूँगा नहीं आपको ऐसे चोदूँगा कि आप पानी-पानी हो जाओगी … सोच लो, मर्जी आपकी. सीधी बात … नो बकवास!’

अब वह कुछ न बोली.

फिर उसने कहा- ठीक है … तेरी ईमानदारी मुझे बहुत अच्छी लगी लेकिन तुम वर्जिन हो न!
मैंने कहा- हां आंटी, मैं वर्जिन ही हूँ. मैं तड़प रहा हूँ … आपको देखने के बाद मेरी तड़प और मेरी आग इतनी बढ़ गई है कि अब मैं अपने होश-हवास खो बैठा हूँ. सिर्फ आपके ही बारे में सोचने लगा हूँ!’

‘बातें तो बड़ी अच्छी कर लेता है तू?’
‘आंटी, प्यार भी ऐसा ही कर सकता हूँ!’

‘अच्छा?’
‘हां आंटी मुझे ज्यादा मत तड़पाओ … मैं तो अभी आपको चोदने के बारे में सोच रहा था!’
‘ओह सच?’
‘आंटी, मैंने आपके लिए मुठ मार ली!’

वह जोर से हंसने लगी- पागल है तू, इतनी रात को एक अनजान औरत के लिए इतना पागल क्यों हो रहा है?
‘आंटी, पागल नहीं हूँ … प्यार करता हूँ आपसे!’

उधर आंटी की हालत भी बुरी थी क्योंकि उसके नीचे वाले छेद से भी ऐसी गंदी बातें करने से रस झरने लगा था.

वह सोच रही थी कि कितना अजीब लड़का है ये … बेशर्म, मुझ जैसी अधेड़ उम्र की औरत को चोदना चाहता है. लेकिन बात भी सही है. उसकी गलती नहीं, जवान लड़का है. मैं भी इतने सालों से अपने पति से ऊब चुकी हूँ. क्यों न मैं भी मजे ले लूँ … इसे हां कह दूँ!

ऐसा लग रहा था मानो आंटी बहुत कन्फ्यूज थी और अपनी चूत पर हाथ मारती हुई ये सब सोच रही थी.

फिर आंटी बोली- चल, रात हो गई है … मैं फोन रखती हूँ, बाद में बात करूँगी!
इतना कहकर उसने फोन रख दिया.

फिर एक हफ्ते तक आंटी की तरफ से कोई जवाब नहीं आया.
मैं उसे सोचने के लिए वक्त देना चाहता था, कोई जबरदस्ती नहीं.

उस तरफ आंटी भी रोज-रोज ये सोचती थी कि क्या करूँ … इस लड़के को सबक सिखाऊं या उसके साथ मजे करूँ? वैसे अच्छा लड़का है, जवान भी है … उसका लौड़ा सख्त होगा.

ये मेरा पति तो एकदम आलसी हो गया है.
फिर आंटी ने मन ही मन मान लिया कि आखिर वह जवान लंड लेकर ही रहेगी.

एक हफ्ते बाद एक रात को आंटी का फोन आया- हाय … क्या कर रहा है?
‘बस आपके फोन का ही इंतजार!’
‘अच्छा … इतनी तड़प है तुझे?’

‘हां आंटी!’
‘आंटी मत बोल … अनीशा बोल पहले तो तेरी बातें सुनकर मैं बहुत गुस्सा हो गई थी कि इतनी जल्दी कोई ऐसी गंदी बातें करना शुरू कर देता है. लेकिन तू मुझे अच्छा लगता है!’

‘सच में? ऐसा क्यों?’
‘क्योंकि तू झूठ नहीं बोलता, सच में तुझे मेरी गांड इतनी पसंद है?’
‘अरे आंटी, क्या बताऊं … आपकी गदराई मस्त गांड को पाने के लिए तो मैं अपनी गांड भी जला दूँगा!’

वह हंसने लगी- साले फिर आंटी!
मैंने सॉरी कहा, तो बोली- अच्छा जोक मार लेते हो … यू आर फनी.

मैंने कहा- वह सब ठीक है, पर कब बुला रही हो?
‘जल्दी ही … जब मैं बुलाऊं तब आ जाना!’

इसका मतलब ये आंटी अब चुदाने के लिए रेडी हो गई थी.
आह मैं बिल्कुल इंतज़ार नहीं कर सकता.
मेरा दिल अनीशा आंटी को चोदने के लिए बेताब था.

फिर वह दिन आ ही गया.

अगले रविवार को आंटी का फोन आया- आज मेरे घर कोई भी नहीं है सब के सब बाहर गए हैं … आज पूरा दिन मैं अकेली हूँ … आएगा क्या?
मैंने कहा- हां.

मैंने घर पर कहा कि मैं अपने एक दोस्त के साथ ट्रिप पर जा रहा हूँ और हो सकता है कि रात को घर न आऊं!

ऐसा कहकर मैं घर से निकल गया.
मैं बाइक लेकर आंटी के घर पहुंचा और डोरबेल बजाई.

आंटी ने दरवाज़ा खोला और तुरंत मैंने आंटी को अपनी गोद में उठा लिया.
मैं उसे लेकर अन्दर लेकर भागा.

आंटी की बड़ी-बड़ी गोल-गोल देसी गांड पकड़ कर उस पर थप्पड़ मारने लगा.

आंटी बोली- अरे अरे रुक न … कितना भूखा है तू? आते ही दबोच लेगा क्या?
मैंने कहा- बस आंटी, अब रहा नहीं जाता!

फिर घर का दरवाजा बंद करके मैं उसे कमरे में ले गया और उसका मुँह पकड़ कर चुम्मी देने लगा.
उसकी गदराई कमर पकड़ कर पागलों की तरह किस करने लगा.

वह मेरी तरफ देखने लगी- हाय हाय कितना अजीब लग रहा है … आज पहली बार कोई मर्द मेरे पीछे इतना पागल हो गया है!
मैंने कहा- कैसे बताऊं … क्या पहले कोई पागल नहीं था?

वह बोली- नहीं … मैं तो एक मामूली औरत हूँ!
‘आंटी, आप मामूली नहीं हो आपका रंग चाहे जैसा भी हो, आपका फिगर बहुत कातिल है आपकी देसी गांड मुझे बहुत भाती है … मुझे तो आपके जैसी मोटी औरतें ही पसंद हैं … मोटी-मोटी गांड वाली. आपको देखकर मैं पूरी तरह से पागल हो जाता हूँ!’

‘मतलब … तुझे मोटी औरतें पसंद आती हैं?’
‘हां आपका पति मूर्ख है … उसे पता नहीं है कि आपकी मोटी गदराई गांड में ही स्वर्ग है. मैं जानता हूँ कि आप मोटी हो इसलिए वह लौड़ा आपसे प्यार नहीं करता. बेवकूफ है वह … मोटी औरत में ही असली मज़ा होता है … उसकी चर्बी से भरी कमर और उसकी मस्त गांड और बोबे को पकड़ने के लिए मर्द बेताब रहते हैं!’

‘काश मेरी शादी तुझसे होती!’
‘आंटी, मुझसे शादी करने की ज़रूरत, अब आपको कोई चिंता नहीं करना है … मैं अब हर वक्त आपका हूँ!’

इतना कहकर मैंने आंटी को पलंग पर लिटा दिया.
वह कामुक आह भरने लगी.

उसने अपनी साड़ी निकाल दी.
साड़ी निकलते ही अनीशा आंटी का मस्त गोल-मटोल बदन नंगा होकर बाहर आ गया.

उसके मस्त देसी बोबे थे.
मैंने आंटी का पेट पकड़ कर उसे चूमना शुरू किया.

वह ‘आह … आह … यूउह’ करने लगी.
फिर मैंने उसे उल्टा किया और आंटी की चर्बी से भरी हुई मस्त दोनों गांड को हाथ में लेकर काटने लगा.

आह क्या मस्त नाज़ुक सॉफ्ट गांड थी आंटी की, मैं गांड को मसलने लगा.
वह सिसकारियां भर रही थी.

उसका अधखुला ब्लाउज, उसके बिखरे बाल … वह भी भूखी शेरनी की तरह कामुक होने लगी थी.
फिर मैं आंटी की चूत को चाटने लगा.
उसका रस झरने लगा.

अब मैं उसके ऊपर आ गया.
मिशनरी पोजीशन में मैं आंटी की चूत में अपना लंड डालने लगा.

आंटी ने अपने भारी पैरों से मुझे दबोच लिया- चोद जोर जोर से … लग जा गले आह … चोद ले मुझे … आह!

फिर मैंने चुदाई की पोजीशन बनाई और आंटी की चूत में लंड पेल कर धक्के मारने लगा.
उसकी गुलाब की पंखुड़ियों जैसी नाज़ुक चूत में मेरा मूसल लंड अन्दर-बाहर आता जाता हुआ दिखाई दे रहा था.

आंटी की चुत से रस छूट जाने फच-फच की मादक आवाज़ें गूँजने लगी थीं.
मैं आंटी को बांहों में लेकर जम कर चोदने लगा.

आंटी का सॉफ्ट बदन मुझे बहुत सुकून दे रहा था.
फिर मैं खड़ा हो गया… आंटी के दोनों बोबे पकड़ कर जमकर पेलने लगा.
आंटी भी साथ दे रही थी.

कुछ देर बाद वह मेरे ऊपर आ गई.
वह अपनी भारी गांड लेकर मेरे ऊपर चढ़ गई और चूतड़ हिला-हिलाकर मुझे चोदने लगी.

आंटी की मस्त गोल-गोल गांड मेरी जांघों से टकरा रही थी.

उससे मुझे बहुत मज़ा आया.

कुछ देर बाद आंटी काँपने लगी, उसका पानी छूट गया.
वह मुझ पर निढाल होकर गिर पड़ी.

लेकिन अभी मेरा पानी नहीं निकला था.
मैंने आंटी को उठाया और डॉगी स्टाइल में कर दिया.
उसके दोनों हाथ पीछे से पकड़ कर आंटी को मैंने अपने पास खींच लिया और उसकी गांड अपने हाथ में लेकर डॉगी स्टाइल में गपागप चोदने लगा.

डॉगी स्टाइल में आंटी की गोल उभरी हुई गांड कुछ ज्यादा ही कातिल लग रही थी.
मैं पूरी तरह से उसका दीवाना हो गया था.
वह भी काफी थक चुकी थी और आंखें मूँदकर पड़ी थी.

मेरे जोर से धक्के मारने की वजह से चिल्ला भी नहीं पाई, वह रोने लगी.

शायद आंटी इतनी ज्यादा थक गई थी कि उसे नींद आ रही थी.
वह अर्धनिद्रा में गजब हिचकोले खा रही थी.

मुझ पर भी उसे चोदने का भूत सवार था.
आंटी की डॉगी स्टाइल में गांड को तो मैं देखता ही रह गया था.
लग रहा था कि उसकी गांड को पकड़ कर बस चोदते ही जाओ.

आखिर मेरा निकलने वाला था तो मैंने लंड बाहर निकाल कर आंटी की गांड पर सब माल छोड़ दिया.

आंटी सिसक उठी- हाय … कितना लंबा चोदा तूने मुझे … जानवर है तू तो पूरा, तेरा इस जवान सख्त लंड ने तो मुझे बेहोश कर दिया है.
वह जोर जोर से हांफ रही थी.

मैं भी गजब की चुदाई से थक गया और आंटी के बाजू में ही ढेर होकर हांफ रहा था.
हमारी सांसें एक-दूसरे से टकरा रही थीं.
आंटी का पसीना मुझ पर छा गया था.

काफी देर बाद हांफना बंद हुआ.
फिर मैंने आंटी को हल्का सा किस किया.

वह बुरी तरह से थक गई थी … आधी बेहोश हो गई थी.
वाकयी मैंने आंटी को बहुत बेरहमी से पेला था क्योंकि उनकी खतरनाक कातिल गांड के सामने लंड भी हार गया था.

कुछ देर तक हम दोनों सोते रहे, फिर वह जागी.
मैंने कहा- क्या हुआ जान-ए-मन?

वह बोली- अरे तूने तो मेरी फाड़ दी आज … आह्ह तेरा लंड तो मेरी चूत में घुस ही गया था.
हम दोनों हंसने लगे.

‘मैं बहुत थक गई हूँ आज से पहले इतनी कभी नहीं थकी … घर का काम करके भी नहीं तू ही मेरी जान है … मेरा राजा कहां था इतनी देर तक तू? मेरी ज़िंदगी में इतनी देर बाद आया?’
मैंने कहा- आंटी, शायद हमारा एक होना मुमकिन नहीं है.

‘फिर भी मेरे प्राण-पति, आप ही हो मैं आपको अपना पति मान चुकी हूँ.’
इतना कहकर वह मेरा लंड चूसने लगी- थक गई हूँ, तो क्या हुआ … तेरा चूस तो सकती ही हूँ!

आंटी के चूसने से लंड फिर खड़ा हो गया.
आंटी ने देर तक लंड को चूसा.

उसके मुँह की लार से लंड एकदम चिकना हो गया था और फड़फड़ाने लगा था.

लंड चुसाई के बीच में एक बार मेरा माल फिर से आंटी के मुँह में निकल गया.
इस बार वह सारा रस पी गई.

अब तक शाम गहरा गई थी.

मैंने कहा- मुझे जाना होगा.
वह रो रही थी- मत जाओ.
मैंने कहा- मर थोड़ी गया हूँ … मिलते रहेंगे.
वह हंस दी.

फिर ऐसे ही मौके मिलते, मैं अनीशा आंटी को चोदने चला जाता और खूब जमकर प्यार करता.
पूरे टाइम उसकी गांड को अपने हाथों में पकड़ कर ही रखता.

आंटी की चर्बीदार गदराई हुई देसी मांसल गांड इतनी मस्त है कि दिल करता है इसके टुकड़े-टुकड़े करके बस खा ही जाऊं.
हाय … मेरी आंटी.

आंटी खुद अपने चूतड़ों को फैलाकर मेरे मुँह पर बैठ जाती है और चूतड़ हिला-हिला कर मुझे मज़ा देती है … असली जन्नत यही है बस.

काश मुझे ऐसी ही मस्त हरी-भरी हुई चर्बी वाली मालदार सेक्सी गांड वाली बीवी मिल जाए तो ज़िंदगी के मजे आ जाएं.

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top