सरकारी अफसर महिला के साथ वासना का रिश्ता- 4

XHindi Chudai Kahani

XHindi चुदाई कहानी में मैंने किसी भाभी को चोदने की तमन्ना के चलते एक भाभी को बस में उससे करके दोस्ती की. उसके साथ मूवी देखी और एक दिन मैंने उसे गर्म करके चोदा.

दोस्तो, मैं राहुल श्रीवास्तव आपको एक सरकारी कर अधिकारी कविता को पटा कर नंगी लिटाए हुए था. कहानी के तीसरे भाग सरकारी महिला अफसर को सेक्स के लिए तैयार किया में अब तक आपने पढ़ा था कि मैं उसे चोदने के लिए गर्म कर रहा था.

अब आगे XHindi चुदाई कहानी:

करीब छह महीनों के बाद वह किसी मर्द के संपर्क में आई थी जो उसको फिलहाल उंगली से चोद रहा था.
पहले एक और फिर दो उंगलियां आराम से चुत में जा रही थीं.

कुछ देर बाद मैंने उसकी टांगें फैला दीं और उनके बीच में बैठ कर उसकी चूत की महक लेने लगा.

उसकी चुत से कामुक और सौंधी सी मस्त महक आ रही थी. शायद उसने अपनी चुत में कोई महक लगाई हुई थी.
मुझसे रहा न गया और मैं अपनी जीभ निकाल कर उसकी चुत को नीचे से ऊपर तक चाटता चला गया.

कविता- स्स्स आहह मर गई … आह और जोर से चाट लो … पूरा अन्दर तक … आह्ह्ह … ईस्स्स्स … .और जोर से … मजा आ रहा है उईई … ईईई मांआआ…

मेरी जीभ में उसकी चुत का लसलसा सा पानी लगता गया और मैं पीता गया.
वह मचलती गई.

कभी मैं ऊपर से चाटता तो कभी नीचे से, कभी चूत के अन्दर तक जीभ डाल देता तो कभी जीभ को अन्दर तक डाल कर चुत को चोदने लगता.

कविता झड़ती रही और मैं पीता रहा.

अचानक से उसने मुझको धक्का देकर गिरा दिया.
नग्न कविता अब मेरे ऊपर सवार थी.

सबसे पहले उसने मेरे बचे हुए कपड़े उतार कर मुझे नंगा कर दिया.
मेरे लंड को देख कर उसकी आंखों में चमक आ गई.

उसने तुरंत मेरे कड़क लंड को अपने हाथों से जकड़ लिया.

मैं- आआह कविता!

कविता ने मेरी ओर देखा और मेरी जांघों पर बैठ कर लंड को अपने मुँह में ले लिया.

मेरी उसके लिए जो फैंटसी थी, वह सच होने लगी.
मेरा लंड उसके मुँह में अन्दर बाहर हो रहा था

मैं- आआआअ … ऊऊऊ … उह … ओह्ह … ’आह … उम्म्म … राज्ज … ओह्ह्ह … चूस लो!
मेरे हाथ खुद उसके सर पर आ गए और उसके सर को पकड़ कर जोर से मुख चोदने लगा.

कविता को परेशानी हुई, उसकी आंख से पानी भी आने लगा.
पर मज़ाल कि उसने मेरे को पीछे धकेला हो.

उसको मेरे जंगली मुख चोदन में मज़ा आ रहा था.
मुँह से गुं गुं गुं की आवाजें और मेरा चोदना, दोनों बराबर से स्पर्धा कर रहे थे.

अचानक से मेरी स्पीड बढ़ी.
कविता को समझ में आया कि मेरा माल निकलने वाला है.

क्योंकि मैं लंड निकलना चाहता था पर उसने मेरी नंगी गांड को पकड़ कर अपने मुँह पर दबा दिया.

उसी के साथ मेरा फव्वारा छूटा और कविता के गले में उतर गया.

वह तब तक लंड तब तक चूसती रही, जब तक एक एक बूंद उसने पी नहीं ली.

हम दोनों ही बुरी तरह पसीने में डूबे गहरी सांसों के साथ अगल बगल लेट गए.
कविता के चेहरे की चमक बता रही थी कि उसको कितना आनन्द आया है.

मैंने उखड़ी सांसों के साथ ही उसकी तरफ करवट ली और अपनी टांग उसकी चूत के ऊपर रख ली.
अपने हाथों को उसकी चूचियों पर जमा दिया और हल्के दबाव के साथ उसके मम्मों को सहलाने लगा.

उसने एक बार मेरी तरफ देखा और आंख बंद करके मेरे स्पर्श को फील करने लगी.

उसकी नग्न जवानी फिर से उमंग भरी अंगड़ाई लेने लगी, जिसमें वासना फिर से उठने लगी, निप्पल हार्ड होने लगे.
मेरे भी लंड में तनाव आने लगा.

उस वक्त मेरा लंड उसकी चूत पर सीधा दस्तक दे रहा था.
लंड में तनाव आता देख कर कविता ने आश्चर्य से देखा कि इतनी जल्दी कैसे लंड तैयार होने लगा.

मैंने भी हल्की मुस्कराहट के साथ एक आंख मार दी तो कविता भी हंस पड़ी.
उसने उठ कर वाइन की बोतल से ही मुँह लगाया और एक बड़ा सा घूंट भर कर अपना जोश बढ़ाया.

फिर वह मेरे करीब आई तो मेरा एक हाथ उसकी चूची मसल रहे थे तो दूसरा हाथ उसकी चूत की सहला रहा था.

जल्दी ही हम दोनों में गर्माहट आ गई और दोनों अब चुदाई के लिए तैयार थे.

कविता ने आगे बढ़ कर मुझे पीठ के बल लिटा दिया और मेरे ऊपर दोनों तरफ पैर रख कर खड़ी हो गई.
उसकी पीठ मेरे मुँह की तरफ थी.

मुझको समझ में कुछ कुछ आ रहा था कि वह क्या चाह रही है.
उसने अपने भारी चूतड़ों को मेरे मुँह पर रख दिया, तो मेरे होंठों में उसकी चूत आ गई थी.

फिर वह झुकी और लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी.

अब उसकी गांड का फूल मेरी आंखों के सामने था और जीभ चूत के अन्दर … साथ में मेरा लंड उसके मुँह में.
एक बार फिर तेजी से मैं उसकी चूत में जीभ से चुदाई कर रहा था.

उतनी ही तेजी से वह भी लंड चूस रही थी.

मेरे होंठ कभी चूत के होंठ को चूसते, तो कभी उसके दाने को काटते, तो कभी मैं दाने को अपने होंठों से दबा कर खींच लेता.

मेरा लंड पूरी तरह से तैयार था और उसके थूक से गीला हो कर कड़क रॉड की तरह हो गया था.

तभी कविता उठी और मेरी तरफ पीठ करके चूत में लंड सैट करने लगी.

थोड़ी देर वह ऐसे ही लंड को चूत में घिसती रही और फिर धीरे धीरे लंड को अन्दर लेने लगी.
उसकी हल्की कराह निकली- आह ईई ईईए आह …

इन्हीं कामुक आवाजों के साथ पूरा लंड चूत के अन्दर समा गया.
वह वैसे ही कुछ सेकंड बैठी रही और गहरी सांस ली.

फिर उसने मेरे पैरों की तरफ झुक कर मेरे घुटने के पास अपने हाथ जमा दिए और धीरे धीरे लंड को अन्दर बाहर करने लगी.
मेरे लंड पर उसके उछलने से और झुकी हुई होने के कारण एक बार फिर से उसकी गांड का फूल मेरी आंखों के सामने था.

इधर उसकी सिसकारियां ‘आह्ग्ग्ग … मर्र्र … गयी … आह्ह्ह …’ निकल रही थीं.
उधर मैंने थूक से उंगली गीली की और दूसरे हाथ से उसकी गांड को जकड़ कर उंगली गांड में डाल दी.

कविता थरथराई, पर उसकी कमर पर मेरी पकड़ मजबूत थी और इधर मैं भी अपनी गांड को उछालने लगा था.
उस पर दो तरफ़ा हमला हुआ था.
एक गांड में उंगली, दूसरा नीचे से लंड का दमदार शॉट.

जितनी तेजी से कविता गांड उछाल कर लंड ले रही थी, उतनी ही तेज़ी से मेरे नीचे से शॉट लग रहे थे.
लंड में चूत में दनादन अन्दर बाहर हो रहा था

‘आअह्ह्ह ऊऊह .. फ़क मी … फ़क मी .. ऊऊह …’

चुदाई के दरमियान ही उसकी चूत से निकलता रस मेरे लंड के जोड़ पर गिर रहा था.

अब उसकी स्पीड बढ़ गई और उसके बाल बिखर चुके थे.
कविता की भारी चूचियां लटक कर डांस के मूड में दिख रही थीं और हिचकोले लेती हुई नाच रही थीं.

‘अआ आहहह … अआ उऊचच … ओय्यय … अआआ … ह्ह्हह … अ..आउच …’
अचानक से वह चिहुंक पड़ी और उसकी जांघों की पकड़ और गहरी हो गई.

मुझे भी समझ में आ गया कि ये अब अपने अंतिम पड़ाव में है.
मैंने गांड से उंगली निकाल कर उसकी गांड को जोर से पकड़ लिया और उसकी गांड को लौड़े पर उछलने में मदद करने लगा.

कुछ ही सेकंड में उसका लावा फूटा और वह भरभरा कर मेरे पैरों के ऊपर गिर सी गई.
अब मैंने मोर्चा संभाला और उठ कर उसको बांहों में भर कर पलट गया.

वह पेट के बल थी.

मैंने पेट के अन्दर हाथ डाल कर उसको उठाया तो वह किसी चौपाया के जैसी बन गई थी.

उसका सर तकिये पर टिक गया था. चूचियां लटक कर बेड से टच हो रही थीं.

मैंने भी सही पोजीशन बनाई और खुद को सैट करके चूत से गिरते रस में लंड भिगोया, कमर पकड़ी … थोड़ा एडजस्ट हुआ और उसकी चूत के अन्दर एक बार में लंड अन्दर तक पेल दिया.

‘उईई … ईईई माआआ … मर गईइइइ … आआआअ … ऊऊऊ … उह … ओह्ह … ’

उसके मुँह से एक सिसकारी निकली … क्योंकि अभी भी तैयार नहीं हुई थी कि मैंने उसकी चूत में पीछे से लंड डाल दिया था.

बस फिर क्या था … आराम से लंड का पिस्टन चलना चालू हो गया.

‘आह ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ईईईईए … ईईई … आह्ह्ह … ईस्स्स्स …’

मैंने उसकी कमर को ठीक से पकड़ कर रखा था और लंड को एक स्पीड में अन्दर बाहर कर रहा था.

कविता को मज़ा आने लगा था और वह खुद अपनी कमर को झटका देने लगी थी.
मेरा लंड अच्छे से चूत में बिना की रुकावट के अन्दर बाहर हो रहा था.

हम दोनों की जांघें आपस में टकरा रही थीं और और पट पट पट की आवाज कविता की ‘उफ्फ़ ओफ्फ आह्ह्ह.’ की आवाज से मिल कर मधुर संगीत पैदा कर रही थी.

लंड लगातार अन्दर बाहर चलता रहा तो कविता थकी सी हो गई.
वह बार बार बेड पर गिरी जा रही थी.

मैंने पोजीशन बदलने की सोची, चुत से लंड निकाल कर उसको पलट दिया.

अब कविता पीठ के बल थी.

पूरी तरह से वस्त्रहीन, बिखरे बाल, आंखें लाल, जिस्म पर ढेरों लाल निशान, चूत से बहता काम रस जांघें फैली थीं, दोनों पैरों के बीच में चूत खुली सी रस टपका रही थी.

उसकी फैली हुई चुत को देख कर मेरा खड़ा लंड फनफना रहा था.
मैं चूत के मुहाने पर सुपारे को रगड़ रहा था.

तभी उसने पैरों को अच्छे से फैलाया और हवा में उठा कर अपने दोनों पैरों से मेरी कमर को कैंची के जैसे जकड़ लिया.

वह मुझे अपनी चूत की तरफ खींचने लगी.

मैंने भी सुपारे को अन्दर धकेला और लौड़े ने चुत में गोता लगा दिया.
आह की आवाज के साथ मेरा लंड बड़े आराम से चूत के अन्दर आ जा रहा था.

चूत की चिकनाई भी मेरे लंड आसानी से अन्दर आने दे रही थी.

कविता एक ऐसी उम्र में थी कि चूत का मुख आसानी से फैल कर कोई भी साइज़ का लंड ले सकता था.

मैं कभी उसकी रसभरी चूचियां चूसता तो कभी निप्पल को दबा कर खींचता और काटता.

उसकी मदमस्त आवाज मेरे जोश को दोगुना कर देती.
‘आह आआह … काटो मत … हुम्म!’

इधर लंड फच्च फच्च कर रहा था.

‘आआह्ह … ओह येस … ओह येस … ओह येस … ओह येस चोदो मुझे आह.’

कविता की मादक आवाजें मेरा जोश बढ़ा रही थीं.

मैं जब भी चोदने के साथ उसकी गर्दन या चूची चूसता, तब तब कविता की आवाज़ निकलती.
‘उफ्फ्फ… आअह.’

एक लय के साथ पूरा लंड चुत में अन्दर बाहर हो रहा था.
साथ में जांघों के टकराने से पट पट पट और फच फच फच की आवाज़ हो रही थी.

मेरा लंड चूत की पूरी गहराई नाप रहा था.

अब मेरा भी स्टैमिना खत्म सा हो रहा था, तो मैंने स्पीड बढ़ा दी.
मैं सुपर स्पीड से उसे चोदने लगा.

कविता की चूचियां थिरकने लगीं.
चूतड़ों में लहरें दौड़ने लगीं.

उसके मुँह से अब ‘ऊंह्ह … ऊंह्ह … ’ की कराहों की जगह ‘आह … ईईश्श … आह्ह … आह्ह … ’ की सिसकारियां सी निकलने लगी थीं.

कोई 30-40 शॉट लगा कर मैंने अपना वीर्य छोड़ दिया और हांफता हुआ उसके ऊपर ढह गया.

कविता ने भी सांसें रोक दीं और वह मेरी बौछार का आनन्द लेने लगी.

उसने मुझे अपनी बांहों में समेट लिया.

उसकी बड़ी चूचियां मेरे सीने से दबी थीं, मेरे हाथ उसके सर और पीठ पर चल रहे थे.

मेरे भारी भरकम शरीर को उसने बड़े आराम से अपने ऊपर लिटा कर रखा था.

अपनी सांस के नियंत्रित होने पर मैं उसके बगल में लेट गया तो कविता मेरी तरफ मुड़ी और मेरे होंठों को चूमने लगी.

काफी देर बाद कविता उठी और वैसी ही नंगी वाशरूम में चली गई.
जब वह वापस आई तो उसके हाथ में गर्म पानी में डूबा हैंड टॉवल था.

पहले उसने मेरे फेस को, फिर बॉडी और अंत में लंड को पौंछ कर अच्छे से साफ किया और वापस टॉवल रख कर आई.
वह मेरे सीने से लिपट गई और उसने मेरे कंधे पर सर रख लिया.

वह मेरे सीने के बालों में कंघी करती रही.

मैंने उसकी तरफ देखा तो उसने शायद समझ लिया कि मैं क्या चाहता हूँ.
तो उसने होंठों पर उंगली रख कर चुप करा दिया.

मैंने भी उसे अपनी बांहों में जकड़ कर उसके बालों को चूम लिया.

बाद में कविता ने बताया कि शादी के बाद आज उसने ऐसा वाइड सेक्स किया है वर्ना सेक्स तो होता था बस सिर्फ खाना पूरी ही होती थी. मैं चाह कर भी अपने हिसाब से सेक्स नहीं कर पाती थी.

उसने कभी पति के ऊपर आ कर सेक्स नहीं किया था. उसको मेरे साथ सेक्स में पूरा सटिस्फैक्शन मिला था.

उसके बाद हम दोनों ने दो दिन तक अच्छा खासा सम्भोग किया. नए नए आसान आजमाए, जो सारे उसकी पसंद के थे.

जब तक वह मुंबई में रही, उसका घर मेरा घर रहा या कहीं रिसॉर्ट में हम दोनों ने सम्भोग का आनन्द लिया.
हम दोनों एक बार गोवा भी गए, जहां आधी रात को रूम से लगे प्राइवेट बीच में न्यूड घुमाया और उसके बाद उसी प्राइवेट बीच में चुदाई की.

बालू से लिप्त जिस्म और चुदाई एक अलग ही मज़ा देती है.

मेरी आज भी उससे बात होती है.

अभी पिछली जुलाई 2025 में हम दोनों मिले थे और अच्छी खासी चुदाई का भी मज़ा लिया था.

आशा है कि ये XHindi चुदाई कहानी आपको पसंद आई होगी.
कहीं कोई कमी लगी हो, तो अवश्य बताएं क्योंकि उससे अगली बार के लेखन में सुधार होता है.
आप अपने विचारों से जरूर अवगत कराएं.

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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