Cousins Sex Kahani
कज़िन्स सेक्स कहानी में दो चचेरी बहनों को लंड की तलब लगी तो उन्होंने पहले लेस्बियन किया, फिर अपने फुफेरे भाई को अपने जिस्म की नंगी झलक दिखाकर उसे गर्म किया.
दोस्तो, मैं कबीर अग्रवाल आपको अपनी एक लड़की दोस्त आकांक्षा की सेक्स कहानी को लिख कर आपके अन्दर की वासना को जगा रहा था.
अब तक आप आकांक्षा की जुबानी सुन चुके थे कि वह छत पर अपने कजिन से चुदने के लिए सैट हो गई थी.
उसके आगे आप पुनः उसी लड़की की जुबानी इस सेक्स कहानी का मजा लें.
दोस्तो, मैं आकांक्षा अपनी कहानी के पहले भाग चचेरी बहनों का लेस्बियन सेक्स में आपको बता रही थी कि मेरा कजिन कबीर मेरी चुत में चिकनाई लेने जाने की कहता हुआ उठ गया था.
अब आगे कज़िन्स सेक्स कहानी:
चुत में क्रीम लगाने के लिए बोलकर वह उठ गया और अपने कपड़े ठीक करके नीचे चला गया.
तब तक कुसुम मेरे पास आई और बोली- क्या हुआ?
मैंने कहा- अन्दर डालने के लिए कुछ जुगाड़ करने गया है.
उसके वापस आने से पहले कुसुम वापस अपनी जगह चली गई.
कबीर वापस आकर मेरे पास लेट गया.
हमने चादर ऊपर डाल दी.
कबीर ने मेरी गाउन ऊपर करके मेरी चूत पर कुछ लगाया.
मैंने पूछा- क्या लगाया?
उसने कहा- बॉडी लोशन है, इससे घुसेड़ने में आसानी होगी.
उसने बहुत सारा लोशन मेरी चूत पर लगाया.
अब मेरी चूत एकदम चिकनी हो गई जिससे उसका बांस अन्दर आसानी से चला जाएगा.
उसने फिर लंड पर भी लोशन लगाया.
फिर मुझे सीधा लिटाकर गाउन और ऊपर को करके मुझसे पैर फैलाने को कहा.
मैंने पैर फैला दिए.
कबीर मेरे ऊपर आया और अपना लंड मेरी चूत पर सैट करके धीरे से धक्का लगाया.
बहुत सारा लोशन और गीली चूत की वजह से आधा अन्दर चला गया.
मुझे तेज दर्द हुआ लेकिन मैंने मुँह में कपड़ा दबा रखा था इसलिए चीख निकल न पाई.
उसने और जोर दिया तो पूरा अन्दर घुस गया.
ऐसा लगा जैसे चूत में किसी ने रॉड घुसा दी हो.
मुझे कुछ ज्यादा दर्द हुआ लेकिन मैंने आवाज नहीं की.
अब कबीर धीरे धीरे मेरे अन्दर लंड पेल कर धक्के लगाने लगा.
मुझे दर्द हो रहा था लेकिन धीरे धीरे मजा आने लगा.
अब मैं मदहोश होने लगी.
कबीर लगातार मेरी चूत में लंड आगे पीछे कर रहा था और साथ में मेरे बूब्स भी दबा रहा था.
मैंने देखा कि कुसुम हमें देख रही थी, साथ में अपनी चूत में उंगली भी कर रही थी.
उसकी चाची अभी भी दूसरी तरफ मुँह करके सो रही थीं.
कबीर ने अब चोदने की स्पीड बढ़ा दी.
मैं भी नीचे से अपनी गांड उठाकर उसका साथ दे रही थी.
फिर कबीर बोला- दीदी, मेरा निकलने वाला है … कहां निकालूँ?
मैंने कहा- अन्दर ही निकालो.
कुछ और देर में दोनों एक साथ डिस्चार्ज हो गए.
फिर कबीर मेरे बगल में लेट गया.
मेरी चूत से उसका गर्म वीर्य बाहर निकल रहा था.
कबीर बोला- बहुत मजा आया दीदी, आप बहुत सेक्सी हो … आपके साथ सेक्स करके मजा आया!
मैंने कहा- मुझे भी मजा आया.
वह मुस्कुराने लगा.
मैंने बोला- मेरा पहला सेक्स था. मैं तो आज दिन में ही तुमसे चुदना चाहती थी, लेकिन तभी गेस्ट आ गए … वरना दिन में ही हम दोनों चुदाई कर लेते.
कबीर बोला- तभी आप अपनी गांड, बूब्स, चूत दिखा रही थीं!
मैं हंस दी.
कबीर बोला- अब मुझे सोना है.
तो मैंने कहा- अभी तो कुसुम की बारी है. वह भी आएगी तुम्हारे लंड का मजा लेने.
कबीर बोला- सच में? वाह आप दोनों तो बहुत चालू निकलीं.
तो मैं बोली- चालू नहीं, सब लड़कियों का मन करता है सेक्स करने का … अब बाहर किसी और से सेक्स करें तो रिस्क रहता है, लेकिन तुम तो घर के हो … तो इसमें रिस्क कम था और घर की बात घर में ही रहेगी.
फिर मैंने कबीर को किस किया और अपनी जगह आकर कुसुम से कहा- तुम जाओ … मैंने सब बता दिया कबीर को.
कुसुम कबीर के पास चली गई.
मैं लेटी लेटी उन्हें देख रही थी.
उन्होंने चादर ओढ़ रखी थी इसलिए ठीक से दिख नहीं रहा था पर पता चल रहा था कि कौन क्या कर रहा है.
कुछ समय बाद उन दोनों का काम निपट गया तो कुसुम मेरे पास आकर सो गई.
मैंने पूछा- कैसा रहा एक्सपीरियंस?
तो कुसुम बोली- बहुत मजा आया. सबसे ज्यादा मजा तो जब उसने चूत में लंड डाला, तब आया.
मैंने पूछा- दर्द हुआ क्या?
तो कुसुम बोली- थोड़ा सा हुआ.
मैंने कहा- मुझे तो अभी भी हो रहा है.
कुसुम ने तब बताया- मैं खीरा अन्दर तक डालती थी, इसलिए उसका मेरी चूत में आसानी से घुस गया था.
‘वह मेरे बारे में भी कुछ बोला क्या?’
‘हां कबीर भी बोला था कि आकांक्षा दीदी की चूत ज्यादा टाइट थी मेरे मुकाबले!’
मैं ये बात सुनकर खुश हो गई.
अब रोज रात को हम ऐसा करते थे.
लेकिन ध्यान रखते थे कि आवाज न हो, वरना चाची को पता चल सकता था.
अब हम चाहते थे कि कभी खुलकर सेक्स करें और तीनों साथ में लेकिन मौका मिल नहीं रहा था.
इसी बीच एक दिन कुसुम बाहर गई हुई थी तो रात को वह नहीं थी.
इसलिए मैं उस दिन छत पर न जाकर नीचे ही रूम में सोई.
लेकिन गर्मी बहुत थी, तो आधी रात को मैं ऊपर सोने गई.
मैंने सोचा, चुपके से जाकर कबीर को सरप्राइज दूँगी.
लेकिन वहां जाकर मैं सरप्राइज हो गई, वहां देखती हूँ कि चाची अपनी साड़ी ऊपर करके पैर फैलाकर लेटी हुई हैं और कबीर उनके ऊपर चढ़ कर उन्हें घपाघप चोद रहा था.
मैं वहां चुपके से देखने लगी.
चाची ‘आह्ह … आह्ह …’ कर रही थीं.
कबीर भी स्पीड बढ़ाकर चोद रहा था.
चाची बोलीं- आज बहुत दिन बाद मजा आया है.
फिर कबीर का पानी निकल गया तो वह साइड में आकर सो गया.
चाची उठकर सीढ़ी की साइड आ रही थीं, तो मैं थोड़ा नीचे जाकर वापस ऊपर आने लगी.
चाची मुझे देखकर चौंक गईं.
उन्होंने पूछा- क्या हुआ?
मैंने कहा- गर्मी बहुत लग रही थी, तो ऊपर आई.
वे कुछ नहीं बोलीं.
फिर मैं भी ऊपर आकर सो गई.
दूसरे दिन चाची बहुत खुश लग रही थीं.
मैंने कबीर को भी नहीं बताया कि मैंने उसे चाची के साथ देखा था रात को.
चाची से मैंने पूछा- आज चाचा आने वाले हैं क्या, जो इतने खुश लग रही हो?
तो चाची बोलीं- नहीं, बस यूँ ही खुश हूँ.
मैंने कहा- लगता है रात को कबीर ने अच्छा मजा दिया.
तो चाची डर गईं.
मैंने कहा- डरिए मत, हम दोनों भी उसका लंड लेती हैं.
चाची ने पूछा- हम दोनों मतलब … और कौन?
तो मैंने कहा- मैं और कुसुम.
चाची हंस कर बोलीं- कबीर ने तो घर में ही चूत ढूंढ ली.
तो मैंने कहा- कबीर ने चूत नहीं ढूंढी … हमने लंड ढूंढ लिया है.
फिर मैंने चाची से पूछा- अचानक कैसे आपने कबीर से सेक्स किया?
तो चाची बोलीं- चाचा से कॉल पर सेक्सी बातें कीं, तो बहुत एक्साइटेड हो गई. तभी देखा कि कबीर भी चादर के अन्दर लंड पकड़ कर हिला रहा था … तो मैंने जाकर उसे पकड़ लिया और सीधा मुँह में ले लिया. फिर आगे का तो तुमने देखा ही है.
मैंने कहा- अच्छा कल पहली बार उसका लिया था क्या?
फिर चाची ने बताया- हां. इसके पहले मैंने अपनी एक फ्रेंड के हसबैंड के साथ भी शादी के बाद सेक्स किया था.
उस रात को कुसुम भी आ गई थी.
छत पर हम चार लोग थे.
मैं, कुसुम, चाची और कबीर.
हमने छत का दरवाजा बंद कर दिया.
हमारे घरों की छत ऐसी थीं कि हम क्या कर रहे हैं, कोई देख नहीं सकता था. क्योंकि हमारे एरिया में सबसे ऊंचा हमारी ही छत थी.
दरवाजा बंद करके हम चारों साथ में बैठ गए.
चाची बोलीं- आज का प्रोग्राम शुरू करने से पहले सब लोग बताओ कि किस किस ने कितनों के साथ सेक्स किया है?
सबसे पहले मुझे बताने को कहा गया. मेरा तो एक ही था कबीर के साथ, तो मैंने बता दिया.
फिर कुसुम ने बताया कि कबीर के अलावा एक बॉयफ्रेंड के साथ एक बार किया था और एक बार गांव में भी एक लड़के के साथ किया था.
मतलब वह कुल 3 लोगों के साथ चुदी थी.
फिर कबीर ने बताया- मैंने तुम तीनों के साथ किया. उसके पहले अपने गांव में 2 आंटी के साथ किया था.
फिर चाची ने बताया कि शादी से उन्होंने पहले 6 लोगों के साथ किया था. फिर शादी के बाद चाचा के अलावा अपनी एक फ्रेंड के हसबैंड के साथ और एक इंस्टाग्राम के फ्रेंड के साथ किया था.
ये सुनकर कुसुम बोली- क्या बात है चाची जी, आपने तो सबसे ज्यादा लंड लिए हैं.
इतना बोलकर कुसुम ने चाची की चूचियों को कपड़ों के ऊपर से ही पकड़ लिया.
चाची भी आह भरके बोलीं- हां मेरी चुदक्कड़ भतीजी, लेकिन लगता है मेरी उम्र तक आते आते तू मुझसे ज्यादा लंड ले लेगी.
यह सब देखकर कबीर भी बहुत एक्साइटेड हो गया.
उसने मुझे पकड़ कर चूमना शुरू कर दिया.
कुछ देर में हम चारों बिल्कुल नंगे हो गए.
चाची के बूब्स सबसे बड़े थे, फिर कुसुम के, फिर मेरे.
हम तीनों एक दूसरे को चूम रहे थे.
कभी मैं कुसुम के बूब्स चूसती, कभी चाची के.
कभी चाची मेरे, कभी कुसुम के. ऐसे ही कुसुम भी कर रही थी
फिर कुसुम ने मुझे नीचे लिटा दिया और मेरी चूत चाटने लगी.
वहीं चाची कुसुम की चूत चाट रही थीं … नीचे लेटकर.
कबीर कहां पीछे रहने वाला था, उसने मेरे मुँह में लंड दे दिया.
ऐसे ही बारी बारी से हम सब एक दूसरे की चूत चाटने लगे.
चाची ने बहुत जोर जोर से मेरी चूत चाटकर पानी निकाल दिया.
फिर कुसुम का निकला.
चाची की चूत सबसे ज्यादा चुदी हुई चूत थी.
उनका अभी भी पानी नहीं निकला था, तो कबीर ने चाची को नीचे लिटाकर उनकी चूत में लंड पेल दिया.
मैं और कुसुम पास में लेटकर देख रही थीं कि कैसे चाची ‘आह… आह…’ करके कबीर का लंड लेने लगी थीं.
वे अपनी गांड उठा उठाकर लंड ले रही थीं.
चाची बहुत गोरी थीं. उनको चुदते हुए देखने का बहुत मजा आ रहा था.
आखिर में कबीर ने चाची का पानी निकाल दिया और कुछ देर बाद वह भी उनकी चूत में झड़ गया.
फिर कुसुम की बारी थी.
कुछ देर ऐसे ही पड़े रहने के बाद चाची मेरी चूत और बूब्स चूसने लगीं.
दूसरी तरफ कुसुम कबीर का लंड चूसने लगी.
जल्दी ही हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गईं और एक दूसरे की चूत चाटने लगीं.
चाची की चूत में से कबीर के वीर्य की खुशबू आ रही थी.
दूसरी तरफ कबीर ने कुसुम को घोड़ी बनाया और उसने कुसुम की चूत में पीछे से लंड डाल दिया.
वह कुसुम को घपाघप चोदने लगा.
कुसुम की गांड काफी बड़ी थी.
कबीर जैसे जैसे तेज रफ्तार से कुसुम को चोद रहा था, वैसे वैसे थप थप की मादक आवाज आने लगी.
कुसुम बहुत मस्ती में चुद रही थी.
दूसरी तरफ मैं चाची के बड़े बड़े बूब्स चूस रही थी. मुझे भी उनके तरबूज जैसे दूध चूसने में बहुत मजा आ रहा था.
मैंने चाची से पूछा- आपके बूब्स इतने बड़े कैसे हो गए हैं?
चाची बोलीं- जब मैं स्कूल में थी, तब से बहुत लोगों ने दबाए हैं. लोग जहां भी मौका मिलता, मेरे दूध दबा देते थे और मैं भी उन्हें दबा लेने देती थी क्योंकि मुझे अपने मम्मों को मसलवाने में बड़ा मजा आता था. बस और ट्रेन में तो लोग भीड़ का फायदा लेकर मेरे बूब्स पकड़ कर मसल ही देते, तो मैं भी उनके और पास हो जाती.
‘वाह चाची आप तो पक्की रंडी हो!’
‘मैंने लेस्बियन सेक्स भी बहुत किया है, तो उस वजह से भी बड़े हो गए हैं!’
मैंने कहा- आप कुछ और किस्से बताओ न!
चाची ने बताया- मैंने अपनी भाभी के साथ भी बहुत बार लेस्बियन सेक्स किया था. उनको मेरे बूब्स बहुत पसंद थे, तो वे बहुत चूसती थीं.
तभी कुसुम की जोर से आह निकल गई और इसी बीच कबीर झड़ गया.
उसने कुसुम की चूत रसीली कर दी.
चाची ने मुझे छोड़ा और कुसुम की चूत चाटने लगीं.
उसकी चुत कबीर के वीर्य से भरी पड़ी थी.
मैं भी चाची की चूत चाटे जा रही थी.
चाची ने कबीर के लंड को मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया.
इधर कुसुम भी खड़ी हो गई और मेरी चूचियां चूसने लगी.
चाची ने कबीर का लंड चूस चूस कर फिर से खड़ा कर दिया.
अब मेरी बारी थी लंड लेने की.
मेरी चूत पहले से ही बहुत गीली हो चुकी थी.
कबीर ने मुझे सीधी लिटा दिया और अपना लंड मेरी चूत पर सैट करके जोर का धक्का लगा कर मेरी चूत में घुसा दिया.
एक साथ पूरा लंड अन्दर घुसा, तो मुझे दर्द होने लगा.
फिर भी मैं आह आह करके लंड ले रही थी.
कुछ ही देर बाद मैं मस्ती से लंड से चुत चुदवाने लगी थी.
कबीर दो बार पहले झड़ चुका था, इसलिए वह जल्दी झड़ने वाला नहीं था.
कबीर जोर जोर से लगातार शॉट लगाता जा रहा था.
इधर हर झटके के साथ मुझे बहुत मजा आ रहा था.
कुछ देर बाद कबीर ने मुझे घोड़ी बनाया और पीछे से चूत में लंड डालकर चोदने लगा.
उसके शॉट के साथ मेरे नितंब पर उसका बदन जब लगता, तो थप थप की आवाज़ आ रही थी.
मैं कुतिया के जैसे झुकी हुई थी, इस वजह से मेरे बूब्स भी हर शॉट के साथ हवा में आगे पीछे हो रहे थे, वह अपने हाथों से मेरे दूध मसलता हुआ मुझे चोद रहा था.
मैं अपने होश में नहीं थी.
कुसुम और चाची क्या कर रहे हैं, मुझे पता नहीं था. मैं तो बस आंखें बंद करके चुदाई का मजा ले रही थी.
कबीर और मेरा राउंड काफी लंबा चला. लेकिन अंत में वह मेरे अन्दर झड़ गया.
फिर हम दोनों वहीं निढाल होकर लेट गए.
चाची ने इस बार मेरी चूत को चाट चाट कर साफ कर दी.
कज़िन्स सेक्स के बाद हम चारों सो गए.
उस रात के बाद तो हर रात, जब तक छुट्टियां थीं, तब तक सेक्स का खेल चलता रहा.
छुट्टियों के बाद कबीर गांव चला गया.
उसके बाद चाची ने एक आदमी सैट किया, जो कभी कभी घर आकर हम तीनों को चोदता था.
उसके साथ जैसे ही मौका मिलता, वैसे ही कभी मैं अकेली, तो कभी तीनों एक साथ सेक्स कर लेती थीं.
कबीर भी जब कभी आता, तो ग्रुप सेक्स कर लेते थे.
जब कोई लंड नहीं मिलता तो लेस्बियन सेक्स तो चलता ही था.
दोस्तो, आपको मेरी यह कज़िन्स सेक्स कहानी कैसी लगी, प्लीज जरूर बताएं.
नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।